2003 के गन्ना आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली के शिकार हुए किसानों की याद में रविवार को मिल गेट पर शहीद मेले का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार पर दमन का आरोप लगाते हुए करारा जवाब देने की हुंकार भरी।
भारतीय किसान यूनियन के बैनर तलेे हुए आयोजन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबदार मुख्य अतिथि रहेे जबकि अध्यक्षता मंडल सलाहकार बेनी माधव त्रिपाठी ने की। सबसे पहले तीनों शहीदों बद्री प्रसाद चौधरी, धर्म राज चौधरी और तिलक प्रसाद की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण करके उन्हें नमन किया। संचालन मण्डल सचिव राम चन्द्र चौधरी ने किया। सभा में मुख्य अतिथि ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार मिलकर किसानों का दमन कर रही हैं। आश्वासन के बावजूद सपा सरकार ने 1999 से बंद मुंडेरवा चीनी मिल नहीं चलावाया। हर बार मिल चलाने की बात होती है पर चालू नहीं होती। कहा कि विजय माल्या जैसे को 10 हजार करोड रुपया देकर सरकार खुद भागने का मौका देती है। अंबानी-अडानी के लिए देश की नीति बनाई जा रही है। 2000 करोड़ रुपये किसानों के बकाये का ब्याज माफ कर देती है लेकिन किसान यदि खेती में पूंजी के लिए दो चार हजार रुपये बैंक का बकाएदार है तो उसेे हवालात में डाल दिया जाता है। लंबरदार ने केंद्र व प्रदेश सरकार को हर मोर्चो पर घेरा।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व विशिष्ट अतिथि दिवान चन्द्र चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के पहले अपने मैनोफेस्टो और सभाओं में कहा था कि अगर उनकी सरकार बनती है तो लागत मूल्य से 50 रुपये जोड़ कर दिया जाएगा। परंतु ढाई साल बीत जाने के बाद भी इस पर विचार नहीं किया गया। राष्ट्रीय सचिव धनश्याम वर्मा ने कहा कि समय आ गया है प्रदेश की सपा सरकार को उखाड फेंका जाए। मंडल महासचिव शोभाराम ठाकुर ने राष्ट्रीय किसान आयोग न बनाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 70 साल से इसकी प्रतीक्षा है।
शहीद मेले को प्रदेश सचिव सुरेश यादव, प्रदेश उपाध्यक्ष रणधीर सिंह, राम सिंह किसान, शिव शकंर पांडेय,दिवान चन्द्र पटेल, शैशव पटेल,राम दुलारे सिंह, रामधनी चौरसिया, मारतेन्द्र प्रताप सिंह छोटू, इलाहाबाद जिलाध्यक्ष शैल कुमारी त्रिपाठी, जनार्दन मिश्रा, अश्वनी, विनोद चौधरी, ब्रहमदीन चौधरी, प्रेम नाथ चौधरी आदि ने भी सभा को सम्बोधित करते हुए नोटबंदी की आलोचना की।
राष्ट्रपति को संबोधित 15 सूत्रीय ज्ञापन एसडीएम राम नरायण त्रिपाठी को दिया गया।