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Basti News: अधिकतर सब सेंटरों पर नहीं पहुंची थी सामग्री, विजिलेंस जांच के लिए जुटा रहे कागजात

Tue, 04 Aug 2026 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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- जिले में संचालित हैं 395 से अधिक सब सेंटर, 1.60 करोड़ के बजट में गड़बड़झाला
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- पूर्व सीएमओ की विजिलेंस जांच के बाद खुलेगी पोल, लिपिक भी हड़बड़ाहट में

बस्ती। जिले के पूर्व सीएमओ डॉ. आरएस दूबे के खिलाफ खरीद और भर्ती में घोटाले की विजिलेंस जांच शुरू होते ही महकमे में खलबली मच गई है। जांच के दायरे में आने वाले लिपिक भी हड़बड़ाहट में है। आनन-फानन में 1.60 करोड़ के भुगतान की जांच कई के गले की फांस बनती दिख रही है। चूंकि जो सामग्री सब सेंटरों पर पहुंचनी थी वे तो पहुंची नहीं, बल्कि किराए में भी खेल कर डाला गया। विजिलेंस जांच के लिए कार्यालय में अब अभिलेख जुटाए जा रहे हैं। बताया गया कि पूर्व में हुई सामग्री वितरण की जांच आधी-अधूरी होने पर उसे रिजेक्ट कर दिया गया था। बाद में डीएम की संस्तुति पर फिर से विजिलेंस जांच शुरू हुई। जांच के बाद इस बड़े खेल के उजागर होने की संभावना है।
पूर्व सीएमओ डॉ. आरएस दुबे के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू हो गई है। विजिलेंस ने सीएमओ बस्ती से साल 2024 में जनपद बस्ती में संचालित 81 स्वास्थ्य उपकेंद्र जो किराए पर हैं, उसके लिए जारी किए गए 1.60 करोड़ रुपये के बजट का लेखा-जोखा मांगा है। बताया गया कि एक ही दिन में टेंडर, डिमांड और भुगतान के मामले में सवाल उठे थे कि कैसे एक ही दिन में सब कुछ हो जाएगा और सामग्री भी पहुंच जाएगी।
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जानकारों का कहना है कि सामग्री, उपकरण सिर्फ कागजों में हुई थी। अधिकांश सब सेंटर बिना सामग्री कर रहे गए। बाद में इस इसकी शिकायत होने शुरू हुई तो शासन ने खुद मामले का संज्ञान लिया और डीएम को जांच कर रिपोर्ट मांगी। डीएम ने प्रारंभिक जांच में गड़बड़ी की आशंका देख विजिलेंस जांच की संस्तुति कर दी। अब, गोरखपुर विजिलेंस टीम जांच शुरू कर दी है। इससे संबंधित खरीद, भर्ती आदि के फाइल तलब किए हैं। बताया गया कि इसमें बिजली, स्टेशनरी, सब सेंटरों के उपकरण और अन्य दवा आदि कार्य शामिल है।
सूत्रों के अनुसार, एक बार जांच हुई तो कुछ ऐसी रिपोर्ट भेजी गई थी, जिससे मामला स्पष्ट नहीं हो सका। दोबारा शिकायत हुई तो मामला फिर से जोर पकड़ा तो विजिलेंस को जांच सौंप दी गई। इसमें दो बाबुओं की भूमिका संदिग्ध है। दोनों ने मिलकर पूर्व सीएमओ को अपने पक्ष में लेकर रातोंरात बिल तैयार करते हुए खरीदारी कर डाली और भुगतान भी हो गया। सामग्री न पहुंचने पर शक गहराया और फिर शिकायत के बाद मामला खुला। अब विभाग में हड़कंप की स्थिति है। एक-एक फाइल सहेजी जा रही हैं। रसीद एकत्र किए जा रहे हैं। फिलहाल, जांच पूरी होने तक विभाग के जिम्मेदारों में खलबली है। उनकी धड़कनें भी बढ़ी हुई है। बता दें कि जनपद में 395 से अधिक सब सेंटर संचालित हैं। वहीं, आशा भर्ती मामले में हुए खेल की भी जांच चल रही है।
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एरियर भुगतान मामले की भी शुरू हुई जांच
बस्ती। जिले में इन दिनों एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग में एरियर का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। करोड़ों रुपये घोटाले के इस मामले में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने मुंह खोल दिया है। इन सभी ने डीएम को शपथ पत्र देकर एरियर के बदले 10 प्रतिशत कमीशन का आरोप सीएमओ कार्यालय में तैनात बाबू पर लगाया है। शपथ पत्र में प्रीति पांडेय, सविता देवी, सरिता देवी और बिंदुबाला ने आरोप लगाया है कि सीएमओ कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक ने वेतन के एरियर को देने के एवज में मोटी रकम वसूली है। न देने वाले कर्मियों का एरियर नहीं दिया जा रहा था। आरोप लगाया है कि वरिष्ठ सहायक ने उच्च न्यायालय के निर्देशों का भी पालन नहीं किया। उन्होंने मनमाने ढंग से एरियर का भुगतान किया। स्वास्थ्य विभाग में जिला मुख्यालय से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक एरियर भुगतान के नाम पर अवैध वसूली का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।
दरअसल, कोर्ट के निर्देश के बाद शासन ने जिले के पुरुष और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के बकाए एरियर के भुगतान के लिए लगभग छह करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी की थी। नियम के मुताबिक, यह पैसा सीधे और एक साथ सभी कर्मचारियों को मिलना चाहिए था लेकिन विभाग के बाबुओं और अधिकारियों की मिलीभगत ने सरकार और कोर्ट के मंशा पर पानी फेर दिया।
आरोप है कि जिन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने ‘सुविधा शुल्क’ या चढ़ावा चढ़ा दिया, उनका एरियर तो तुरंत क्लियर हो गया लेकिन ईमानदारी की राह पर चलने वालों की फाइलें आज भी दफ्तरों की धूल फांक रही हैं। अब मामले में नया मोड़ आ गया है। इस मामले में महिला कार्यकर्ताओं ने डीएम को शपथपत्र देकर मुख्यालय पर तैनात बाबू आरोपी किया है। फिलहाल अभी इस मामले में गेंद डीएम के पाले में पहुंच गई है। पीड़ितों का कहना है कि कथित संरक्षणदाताओं के सहयोग से वरिष्ठ लिपिक अपनी गिरेहबान बचाना चाह रहे हैं। सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने बताया कि मामला सामने आया है। इसकी भी जांच कराई जाएगी।
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विजिलेंस ने जो अभिलेख मांगा है उसे एकत्र किया जा रहा है। सभी बिंदुओं की जांच हो इसके लिए कागजात तैयार कराए जा रहे हैं। सामग्री खरीद, दवा, किराए से संबंधित रसीद आदि मांगे गए हैं। जल्द ही जांच टीम को कागजात दे दिए जाएंगे।
- डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती।
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