बस्ती। सहालग में डीजल-पेट्रोल की कमी ने लोगों की मुसीबत बढ़ा दी है। बिना वाहन के न तो काम-धंधा हो पा रहा न ही शादी-विवाह की तैयारी। खेती-किसानी भी डीजल-पेट्रोल से संचालित यंत्रों पर ही निर्भर है। मगर तेल की किल्लत चौतरफा देखने को मिल रही है। अधिकतर पेट्रोल पंप सूखे पड़े हैं। इससे हाहाकार मचा हुआ है।
एक पंप खुल रहा है तो आसपास पांच-सात किमी के दायरे में आने वाले अन्य पंप बंद चल रहे हैं। इसी वजह से कहीं भीड़ देखी जा रही हैं तो कहीं सन्नाटा पसरा हुआ है। बुधवार को शहर के मालवीय मार्ग पर तीन पंप, दक्षिण, दरवाजा, रेलवे स्टेशन और कचहरी स्थित पंप डीजल- पेट्रोल के अभाव में बंद कर दिए गए। बुधवार को केवल गांधीनगर और कचहरी स्थित पेट्रोल पंप पर ही डीजल- पेट्रोल मिल रहा था। बाकी पंप बंद पाए गए।
इसका बाजार पर भी असर पड़ने लगा हैं। एक दुकान पर लड़की की विदाई में दी जाने वाली सामग्री की खरीदारी करने पहुंचे प्रभात कुमार ने बताया कि गाड़ी, पंखा, एसी, कूलर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, स्मार्ट टीवी जैसे उपकरणों के दामों में कोई तोल- मोल नहीं हो पा रहा है। दुकानदार तत्काल गैस और डीजल- पेट्रोल की किल्लत का हवाला देते समझा रहे हैं। इलेक्ट्रिक सामानों का उत्पादन कम हो गया है। जिससे इन सामग्रियों की आपूर्ति घट गई है। आर्डर के हिसाब से इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियां नहीं आ पा रही है। दाम में भी पांच प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इसलिए ग्राहकों को छूट देने की गुंजाइश नहीं रह गई है। मजबूरी में महंगे दामों में सामान खरीदना पड़ रहा है।
जानकारों का कहना है कि डीजल- पेट्रोल की आपूर्ति में भी पचास प्रतिशत से अधिक की कटौती की जा रही है। इस्राइल- ईरान युद्ध के शुरुआती दौर में ही पेट्रोलियम कंपनियों ने क्रेडिट व्यवस्था खत्म कर दी थी। अब एडवांस भुगतान करने मालिकों को भी डीजल- पेट्रोल समय से नहीं मिल पा रहा है। बताया जा रहा हैं कि गोंडा और देवरिया के बैतालपुर तेल डिपो ड्राई पड़ गया है। पूर्वांचल के अधिकांश जिलों में लखनऊ डिपो से तेल की आपूर्ति हो रही है। समूचे शहर में नौ पेट्रोल पंपों की जगह एक या दो पंप ही संचालित पाए जा रहे हैं।
शहर के आसपास के क्षेत्र परसा हज्जाम, महुली मार्ग, गनेशपुर, गोटवा, कप्तानगंज, नगर बाजार, मनौरी, भिटिया आदि जगहों पर 15 से 20 पेट्रोल पंप ड्राई पड़ गए हैं। लोग दो पहिया, चार पहिया वाहन लेकर पेट्रोल डीजल के लिए इधर से उधर भटकते नजर आ रहे हैं। पेट्रोल लेने पहुंचे ग्राहक सुभाष कहते हैं कि आजकल रसोई गैस और पेट्रोल- डीजल सबसे महत्वपूर्ण हो गया है। इसके बगैर किसी का काम नहीं चलने वाला है। इसीलिए लोग अपना काम छोड़कर पहले पेट्रोल- डीजल के लिए दौड़ भाग कर रहे हैं।