बस्ती। पश्चिमी एशिया में तेज होती जा रही जंग के बीच अबूधाबी में एक सप्ताह से फंसे मखौड़ा धाम स्थित रामजानकी मंदिर और अयोध्या दशरथ महल के महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य स्वदेश लौट आए।
उनकी फ्लाइट बृहस्पतिवार की सुबह करीब 9:30 बजे अयोध्या एयरपोर्ट पर लैंड किया। इसके बाद वह अयोध्या स्थित दशरथ महल गए और पूजा-पाठ की। उन्होंने बताया कि आबूधाबी स्थित स्वामी नारायण मंदिर के स्वामी के बुलावे पर वह 27 फरवरी को वहां गए थे, वापसी पांच मार्च को हो पाई।
बातचीत में महंत ने बताया कि जिस स्थान पर वह रुके थे, वहां से पांच किमी की दूरी पर अमेरिकी सैन्य स्थल है। यहां पर मिसाइल से ताबड़तोड़ हो रहे हमले से हर कोई सहम जाता था। लोगों ने घरों से निकलना बंद कर दिया है। चारों तरफ सन्नाटा और भय का माहौल है। तेज धमाका करते हुए गिर रहे मिसाइल से आसपास की धरती हिल जाती है। लोग कांप उठते हैं।
लगता है कि मौत उनका इंतजार कर रही है। महंत ने बताया कि अक्षर धाम ट्रस्ट की तरफ से आबूधाबी में भव्य स्वामी नारायण मंदिर का निर्माण कराया गया है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। वह 27 फरवरी को आबूधाबी गए थे, इस बीच वहां युद्ध छिड़ गया और फ्लाइटें रद्द हो गईं।
ऐसे में वतन वापसी में समस्या खड़ी हो गई। महंत ने बताया कि वह अबूधाबी शहर में अपने भक्त मुरलीधर मिश्रा के घर रुके थे। वहां करीब 20 प्रतिशत आबादी भारतीयों की है। पास में ही अमेरिका के सैन्य स्थल पर रुक-रुक कर मिसाइल से हमला होने लगा। इसकी आवाज लोगों का दिल दहाला देती थी।
उन्होंने बताया कि अबूधाबी में रह रहे बहुत से लोग हमले से भयभीत हैं। उनका काम धंधा भी रुक गया है। घर से बाहर निकलने के लिए डर रहे हैं। किसी तरह उनकी दिनचर्या आगे बढ़ रही है। महंत ने बताया कि जिस भक्त के घर वह रुके थे, वहां आसपास रह रहे भारतीय मन की शांति के लिए उनके पास आ जाया करते हैं। वह प्रभु श्रीराम की कथा सुनाकर उनके अंदर से भय दूर करने की कोशिश करते थे। ऐसे में एक सप्ताह कैसे गुजर गया कुछ पता ही नहीं चल पाया।