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Basti News: जिला महिला अस्पताल में शुरू होगी एलएमयू, नवजातों को आसानी से मिलेगा मां का दूध

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जिला महिला अस्पताल का एसएनसीयू संवाद
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बस्ती। जिला महिला अस्पताल में करीब 10 साल बाद लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट (एलएमयू) शुरू होने जा रही है। इससे प्रसव के बाद पर्याप्त स्तनपान न करा पाने वाली माताओं के नवजातों को मां का दूध उपलब्ध कराया जा सकेगा। यूनिट के लिए वार्ड तैयार हो चुका है। रेफ्रिजरेटर, डीप फ्रीजर और दूध निकालने की मशीन समेत कुछ जरूरी उपकरण भी अस्पताल पहुंच गए हैं। शेष उपकरण मिलने के बाद उच्च अधिकारियों की मौजूदगी में यूनिट का उद्घाटन कराया जाएगा।
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125 बेड वाले जिला महिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 250 से 300 महिलाएं आती हैं। यहां औसतन 20 से 30 प्रसव प्रतिदिन होते हैं, जिनमें सामान्य प्रसव के साथ ऑपरेशन से होने वाले प्रसव भी शामिल हैं। अस्पताल में कंगारू मदर केयर (केएमसी) और सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) की सुविधा भी है। शासन के निर्देश पर नवजातों के लिए मां के दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एलएमयू स्थापित की जा रही है।
एलएमयू में तैनात कर्मी प्रसूताओं को स्तनपान कराने और दूध निकालने में सहयोग करेंगी। संग्रहित दूध पर तारीख और समय समेत आवश्यक विवरण दर्ज किया जाएगा। अस्पताल के अनुसार, रेफ्रिजरेटर में मां का दूध 24 घंटे और डीप फ्रीजर में एक महीने तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। जरूरत के अनुसार विशेष रूप से एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को यह दूध उपलब्ध कराया जाएगा।
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18 बेड का एसएनसीयू अक्सर रहता है फुल
जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में 18 बेड हैं। अस्पताल के अनुसार यहां अक्सर सभी बेड भरे रहते हैं। जगह उपलब्ध न होने पर गंभीर नवजातों को दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है। एलएमयू शुरू होने से एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को मां का दूध उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
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इच्छुक माताएं कर सकेंगी दूध दान
एलएमयू शुरू होने के बाद इच्छुक माताएं अपना अतिरिक्त स्तन दूध दान कर सकेंगी। इसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित तरीके से संग्रहित कर जरूरतमंद नवजातों को दिया जाएगा। अस्पताल के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में मां का पर्याप्त दूध उपलब्ध नहीं होने पर वैकल्पिक आहार की जरूरत पड़ती है। ऐसे मामलों में मां का सुरक्षित रूप से संग्रहित दूध उपयोगी साबित हो सकता है।
कोट
जिला महिला अस्पताल में लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट के लिए वार्ड तैयार हो चुका है। कुछ जरूरी उपकरण मिल गए हैं और शेष उपकरण भी जल्द उपलब्ध हो जाएंगे। इससे नवजात शिशुओं, विशेषकर प्रीमैच्योर बच्चों के उपचार में मदद मिलेगी।
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- डॉ. राजीव निगम, सीएमओ
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