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Basti News: लेखपालों ने छोड़ा हल्का, जरूरी काम अटके

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सदर तहसील में बस्ता जमा करने के दौरान लेखपाल स्रोत संगठन
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बस्ती। अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे लेखपालों के अतिरिक्त हल्कों का काम छोड़कर बस्ता जमा करने से जिले के 550 से अधिक गांवों के काश्तकारों और आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अतिरिक्त प्रभार वाले गांवों में लेखपालों के काम नहीं करने से आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र के सत्यापन, वरासत, खतौनी, अंश निर्धारण समेत अन्य राजस्व कार्य प्रभावित होने लगे हैं। ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े कार्यों पर भी इसका असर पड़ने लगा है।
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लेखपालों के अतिरिक्त प्रभार वाले गांवों में बस्ता जमा होने के बाद राजस्व संबंधी कार्य आगे बढ़ाने में दिक्कत आ रही है। आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र के लिए लेखपाल की रिपोर्ट और सत्यापन की जरूरत होती है। इसी तरह भूमि की वरासत दर्ज कराने, खतौनी में नाम चढ़ाने, अंश निर्धारण और अन्य अभिलेखीय कार्यों में भी लेखपाल की भूमिका अहम होती है। जिले की हर्रैया, बस्ती सदर, भानपुर और रुधौली तहसीलों में बड़ी संख्या में गांव अतिरिक्त हल्के के दायरे में हैं।
लेखपालों के अतिरिक्त प्रभार छोड़ने से इन गांवों के लोगों को अपने जरूरी काम के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। खासकर सरकारी योजनाओं, प्रवेश, नौकरी या अन्य कार्यों के लिए समय पर प्रमाणपत्र की जरूरत वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। राजस्व कार्य प्रभावित होने से काश्तकारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जमीन से जुड़े मामलों में स्थलीय सत्यापन और अभिलेखीय प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर लोगों को संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
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हर्रैया में 133 हल्के रिक्त, रुधौली में 121 हल्कों का काम प्रभावित
हर्रैया संवाद के अनुसार, तहसील में 385 हल्के हैं। इनमें 252 लेखपाल कार्यरत हैं, जबकि 133 हल्के रिक्त हैं। इन रिक्त हल्कों का अतिरिक्त कार्य अन्य लेखपाल देख रहे थे। आंदोलन के तहत अतिरिक्त प्रभार छोड़ने से इन गांवों में राजस्व कार्य प्रभावित हुए हैं। रुधौली संवाद के अनुसार, तहसील में 121 हल्कों का काम प्रभावित हुआ है। यहां अतिरिक्त हल्कों का कार्य देख रहे लेखपालों ने बस्ता जमा कर दिया है। इससे आय, जाति, निवास, वरासत, हैसियत प्रमाणपत्र, ईडब्ल्यूएस और अंश संशोधन समेत अन्य राजस्व कार्यों पर असर पड़ रहा है। लेखपाल संघ के अनुसार, 22 सितंबर से अतिरिक्त हल्कों में कार्य बहिष्कार किया जा रहा है।
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भानपुर में 46 गांवों के बस्ते जमा
भानपुर। लेखपाल संघ के आह्वान पर तहसील के 36 लेखपालों ने 46 गांवों के बस्ते राजस्व निरीक्षक कार्यालय में जमा कर दिए हैं। इससे इन गांवों से जुड़े 154 मजरों में लेखपाल से संबंधित कार्य प्रभावित हुए हैं। तहसील अध्यक्ष कमलभान पांडेय ने बताया कि वरासत, वारिस, आय, जाति, निवास, बंटवारा, ईडब्ल्यूएस, फार्मर रजिस्ट्री, आईजीआरएस, जनता दर्शन के प्रार्थनापत्रों का निस्तारण, कृषक दुर्घटना, आपदा, अंश निर्धारण, नाम व अंश संशोधन, आवास सत्यापन और स्टांप जांच समेत कई कार्य लेखपालों से जुड़े हैं। तहसील में 435 गांवों के लिए 69 लेखपाल तैनात हैं। जिम्मेदारों के अनुसार, कार्य बहिष्कार का अभी दूसरा दिन है। ऑनलाइन आवेदनों के निस्तारण के लिए निर्धारित समय सीमा होने के कारण फिलहाल आवेदन लंबित या डिफॉल्टर की स्थिति में नहीं हैं। हालांकि, स्थलीय निरीक्षण और मौके पर जाकर शिकायतों के निस्तारण का काम प्रभावित हो रहा है।

बोले काश्तकार
लेखपालों के हड़ताल पर जाने और अतिरिक्त हल्कों का बस्ता जमा होने से गांव में परेशानी बढ़ गई है। कई ऑनलाइन काम नहीं हो पा रहे हैं। इसका कोई वैकल्पिक इंतजाम होना चाहिए।
-राजेंद्र कुमार, बढ़या राजा
हड़ताल के चलते राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अंश निर्धारण के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक काम नहीं हुआ है। अब इसके और लंबित होने की आशंका है।
-विनोद सिंह, खरदेउरा
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15 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
लेखपाल संघ के महामंत्री महेंद्र यादव ने बताया कि मांगों के संबंध में 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने बताया कि लेखपाल अपने मूल तैनाती वाले गांवों का कार्य कर रहे हैं, जबकि अतिरिक्त प्रभार वाले गांवों का काम छोड़ दिया गया है। जिला मंत्री अंकित चौधरी के अनुसार, चारों तहसीलों में अतिरिक्त प्रभार वाले करीब 550 गांवों में लेखपालों से जुड़े कार्य प्रभावित हुए हैं। संगठन के अनुसार, इससे बड़ी संख्या में ग्रामीणों और अभ्यर्थियों को परेशानी हो रही है।
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