बस्ती। लगातार बारिश शनिवार को जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों के लिए मुसीबत बन गई। जिला महिला अस्पताल में ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और वार्ड तक छत टपकती रही, जबकि जिला अस्पताल की ओपीडी और पर्चा काउंटर के पास पानी भर गया। बिजली आपूर्ति बाधित होने से कई ओपीडी कक्षों में अंधेरा रहा और चिकित्सकों को उसी में मरीज देखने पड़े। जलभराव, सीलन और छत से टपकते पानी के बीच मरीजों और तीमारदारों को परेशानी उठानी पड़ी।
बारिश के कारण जिला अस्पताल में शनिवार को ऑनलाइन पर्चा नहीं बन सका। पर्चा काउंटर के आसपास पानी भरने से मरीजों को आने-जाने में दिक्कत हुई। सामान्य दिनों की तुलना में ओपीडी में भीड़ कम रही। दोपहर 12 बजे तक 232 पर्चे बनाए गए थे। ओपीडी कक्षों में बिजली न होने से चिकित्सकों ने मोबाइल और अन्य वैकल्पिक रोशनी के सहारे मरीजों की जांच की। कई कक्षों में छत से पानी टपकता रहा। इससे कुर्सियां और अन्य सामान भीग गए। पैथोलॉजी जांच व्यवस्था भी बारिश और बिजली संकट से प्रभावित रही।
दोपहर 12 बजे तक दंत रोग विभाग में छह, नेत्र रोग में सात, सर्जरी में 17 और आर्थोपेडिक विभाग में 10 मरीज देखे गए। बाल रोग विभाग की दोनों ओपीडी में सवा 12 बजे तक 30 बच्चों की जांच हो चुकी थी। फिजिशियन कक्ष में 27 मरीज देखे गए। कई चिकित्सक भी बारिश के कारण ओपीडी में नहीं पहुंच सके।
इमरजेंसी के कुछ वार्डों में भी छत से पानी टपकता रहा। बिजली आपूर्ति बाधित होने से अस्पताल में पानी का संकट भी खड़ा हो गया। एसआईसी ने नगर पालिका से टैंकर मंगवाया, लेकिन बिजली न होने से आवासीय परिसर की मोटर नहीं चल सकी। इससे चिकित्सकों और कर्मचारियों को भी परेशानी हुई।
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महिला अस्पताल में टपकती छत के नीचे लेटी रहीं प्रसूताएं
जिला महिला अस्पताल में बारिश से मरीजों, प्रसूताओं और तीमारदारों की मुश्किल बढ़ गई। ओपीडी, लैब, किशोरी काउंसलर कक्ष और अल्ट्रासाउंड कक्ष में सीलन रही। इमरजेंसी के आसपास छत से पानी टपकता रहा। मरीजों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। परिसर में जलभराव और फिसलन से भी परेशानी हुई। जनरल सर्जरी वार्ड में छत से पानी टपकने के बावजूद प्रसूताएं बेड पर लेटी रहीं। कई बेड और मरीजों का सामान भीग गया। तीमारदारों ने बताया कि भवन पुराना और जर्जर होने के कारण प्लास्टर गिरने का डर बना रहता है। बारिश के कारण ओपीडी में भी मरीजों की संख्या कम रही।
बोले मरीज-तीमारदार
17 सितंबर को पत्नी सविता का अल्ट्रासाउंड कराने आए थे। 26 सितंबर की तारीख मिली थी। बारिश में भीगते हुए पहुंचे तो मशीन खराब मिली। इसके बाद बारिश में ही लौटना पड़ा।
-सुनील कुमार चौधरी, पैड़ा
दो दिन पहले बहू का सीजर से प्रसव हुआ था। जनरल वार्ड में रातभर छत से पानी टपकता रहा। बेड बार-बार इधर-उधर करना पड़ा। कपड़े भीग गए और मरीज को भी परेशानी हुई।
- सुभावती, भारतभारी
पत्नी का सीजर से प्रसव हुआ है। बारिश में वार्ड पानी-पानी हो गया। छत से पानी टपकने और सीलन के बीच मरीज-तीमारदार किसी तरह रह रहे हैं। प्लास्टर भी छोड़ रहा है, जिससे डर बना हुआ है।
- आजाद अली, परसपुरा
जिला अस्पताल पहुंचने पर ऑनलाइन पर्चा नहीं बना। ऑफलाइन पर्चा बनवाकर जांच कराई। छत टपक रही थी, परिसर में पानी भरा था और बिजली न होने से जांच में भी परेशानी हुई।
- पूनम, साड़ी दीनदयाल
कोटपुरानी बिल्डिंग होने के कारण ओपीडी की छत टपकने और सीलन की समस्या हुई है। परिसर में जलभराव से निजात के लिए कई बार स्थानीय प्रशासन से पत्राचार किया गया है। लो-लैंड होने के कारण बारिश में परेशानी होती है। स्थायी समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर जनरेटर से काम चलाया गया।
- डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल