बस्ती। जिले में निराश्रित गोवंश की समस्या से निपटने के लिए छह ब्लॉकों में नए गो-आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्रयास शुरू है। भूमि के लिए पशुपालन विभाग ने प्रशासन को पत्राचार किया है। भूमि मिल जाने के बाद प्रस्ताव बनाकर शासन को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।
जिले के सड़कों पर निराश्रित गोवंश के कारण होने वाले हादसों को रोकने और फसलों को सुरक्षा के लिए जिले में में पांच नए वृहद गो-आश्रय स्थल और तीन कान्हा गोशाला व तीन कांजी हाउस चल रहा है। यहां करीब 33 सौ पशु संरक्षित किए गए हैं।
वहीं, अब छह और केंद्र बनाने के लिए पहल हुई है। इन केंद्रों के शुरू होने से 2400 से अधिक गोवंश के संरक्षण की सुविधा बढ़ जाएगी। इससे किसानों को राहत मिलेगी, साथ ही निराश्रित पशुओं के चलते होने वाले सड़क हादसे भी कम होंगे।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार गुप्ता ने बताया कि छह ब्लॉकों में केंद्र बनेंगे। इसके लिए . 05 हेक्टेयर से एक हेक्टेयर तक की भूमि मांगी गई है। ये गो-संरक्षण केंद्र हर्रैया, बहादुरपुर, सदर, कुदरहा, सल्टौआ और विक्रमजोत ब्लॉक में बनाए जाएंगे। सीवीओ ने बताया कि आश्रय स्थल के लिए भूमि खोजी जा रही है। बताया कि वर्तमान में विभिन्न आश्रय स्थलों में संरक्षित पशुओं की देखभाल की जा रही है।
नए केंद्रों के अस्तित्व में आने से जिले में वृहद गो-आश्रय स्थलों की संख्या बढ़ जाएगी। वृहद गो-शाला की संख्या 10 हो जाएगी। अभी वर्तमान में कुल, 59 केंद्र संचालित हैं। इसमें अस्थायी गोशालाएं भी हैं।
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आपसी समन्वय की कमी से लटकीं दो परियोजनाएं, हैंडओवर बढ़ा इंतजार
पशुपालन विभाग की ओर से जिले में दो वृहद गो संरक्षण केंद्र 3.20 करोड़ रुपये से बनाए जा चुके हैं। कार्यदायी संस्था सी एंड डीएस को फरवरी 2026 तक हैंडओवर कर देना था, मगर दो विभाग के आपसी समन्वय की कमी के चलते हैंडओवर का इंतजार बढ़ गया है। जबकि दोनों परियोजना का लोकार्पण के लिए पूर्व में प्रयास भी हुआ, मगर तकनीकी कारणों से मामला लटक गया। बताया गया कि पहला गो संरक्षण केंद्र ग्राम सिकटा हर्रैया क्षेत्र, दूसरा नारायनपुर हर्रैया में बनकर तैयार है। इसके पूर्ण होने से यहां निराश्रित पशुओं को संरक्षित किया जा सकेगा। हालांकि, अभी हैंडओवर न होने से मामला लटका है।
कोट
सिकटा व नारायनपुर में बनकर तैयार हुए केंद्र का हैंडओवर जल्द होगा। इसके लिए प्रयास जारी है। वहीं, भूमि मिलने के बाद छह और केंद्र बनाए जाएंगे।
-डॉ. अरुण कुमार सिंह, सीवीओ, बस्ती।