बस्ती। संस्थागत प्रसव की अहम कड़ी आशा ही इसमें ढिलाई बरत रही हैं। सीएमओ की ओर से जारी की गई सूची में 235 आशाएं ऐसी पाई गई हैं, जो सिर्फ नाम की आशा बनी हैं। उन्होंने अपने क्षेत्र में शून्य प्रसव का रिकाॅर्ड बनाया है। ऐसी आशाएं चिह्नित हुई हैं और इन पर सेवा से बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है।
जिले में वित्तीय वर्ष 2024-25 और चालू वित्तीय साल में शून्य और एक प्रसव कराने वाली 235 आशाओं की सूची बनी है। उन्हें एमओआईसी के जरिये सीएमओ ने नोटिस जारी किया है। सुधार न आने पर सेवा से हटाने के लिए निर्देशित किया है। स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं, जैसे जननी सुरक्षा योजना, नियमित टीकाकरण, क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम में आशा रोल निभा रही।
जननी सुरक्षा योजना के तहत जिला महिला चिकित्सालय समेत सभी 14 सीएचसी पर प्रसव दर में कमी आने की समीक्षा हुई, जिसमें पाया गया कि आशा ही संस्थागत प्रसव में रुचि नहीं दिखा रहीं। हाल यह है कि आशाओं ने पांच से छह माह में अपने क्षेत्रीय गांव से शून्य सा फिर एक ही प्रसव कराया है। इस पर सीएमओ ने कड़ी नाराजगी जताई है। सीएमओ डॉ. राजीव निगम ने फिसड्डी सभी 235 आशाओं को एमओआईसी के जरिये संस्थागत प्रसव बढ़ाने संबंधी नोटिस जारी किया है। सीएमओ ने बताया कि आशा संस्थागत प्रसव में सहयोग नहीं करेंगी तो सेवा समाप्ति के लिए नोटिस जारी करते हुए कार्रवाई की जाएगी।