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Basti News: कही जर्जर लैब तो कही नहीं हैं शिक्षक, विद्यार्थी कैसे कर पाएंगे वैज्ञानिक प्रयोग

Sat, 26 Nov 2022 10:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती।

सार

जिले में 401 स्कूल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संचालित होते हैं। जिसमें 23 राजकीय और 70 सहायता प्राप्त स्कूल हैं। स्कूलों में लैब बने हैं। लेकिन, बदहाल पड़े हैं। स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती जरूर है। लेकिन बेहतर व्यवस्था न होने के कारण लैब जर्जर हो चुका है।
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बस्ती समाचार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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यूपी बोर्ड से संचालित माध्यमिक विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं। लेकिन, अधिकतर स्कूलों में विज्ञान की प्रयोगशालाएं जर्जर हो चुकी हैं। इसके साथ स्कूलों में जहां लैब हैं, वहां शिक्षकों की कमी भी जारी है। आज भी विद्यार्थी जर्जर कमरों में चल रही प्रयोगशालाओं में पढ़ाई व प्रैक्टिकल करने को मजबूर हैं।

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जिले में 401 स्कूल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संचालित होते हैं। जिसमें 23 राजकीय और 70 सहायता प्राप्त स्कूल हैं। स्कूलों में लैब बने हैं। लेकिन, बदहाल पड़े हैं। स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती जरूर है। लेकिन बेहतर व्यवस्था न होने के कारण लैब जर्जर हो चुका है। वहीं राजकीय इंटर कॉलेज का निर्माण दस दशक पहले हुआ था। इसमें विज्ञान वर्ग में 146 छात्र पंजीकृत हैं। विज्ञान लैब जर्जर होने के कारण छात्र किसी तरह पढ़ते हैं। लैब का फर्नीचर टूटा है। यहां न प्रकाश की सुविधा है और न ही पानी की व्यवस्था है। कमरे का प्लास्टर टूट टूट गिर रहा है। किसी तरह छात्र लैब में प्रयोग करते हुए अध्ययन करते हैं।

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में 129 छात्राएं पंजीकृत हैं। यहां प्रयोगशाला में आवश्यकतानुसार सभी संसाधन, उपकरण मौजूद हैं। रसायन विज्ञान में प्रवक्ता न होने के कारण संविदा पर शिक्षक नियुक्त हैं। सल्टौआ क्षेत्र के आदर्श इंटर कॉलेज गोपालपुर में विज्ञान वर्ग से 280 छात्र पंजीकृत हैं। यहां का विज्ञान लैब बदहाल हो चुका है।
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प्रधानाचार्य वीरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि जो उपकरण हैं उसी से पढ़ाई व प्रयोग का कार्य होता है। कोई अलग से बजट न मिलने के कारण प्रयोगशाला सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पा रही है। छात्र आधे-अधूरे उपकरणों से काम चलाने को मजबूर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हालात इतने अच्छे नहीं हैं। छात्र कहते हैं कि लैब में उपकरण काफी पुराने होने के कारण छात्र प्रैक्टिकल नहीं कर पाते हैं। बल्कि रटकर पढ़ लेते हैं। स्कूलों में व्यवास्थाओं की कमी होने के कारण विज्ञान शिक्षा प्रभावित हो रही है।

स्कूल प्रबंधन को विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल कराने के निर्देश
डीआईओएस डीएस यादव ने बताया कि प्रधानाचार्यों और स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल जरूर कराएं। जहां परेशानी है वहां आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएं जिससे विद्यार्थियों का नुकसान न हो।

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