संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। होली में धंंधेबाजों ने खोआ-पनीर सहित दूध से बने खाने-पीने के सामान में ऐसी-ऐसी चीजों की मिलावट कर दी है जो सेहत का तानाबाना बिगाड़ देगी। मिलावटी खोआ का लावारिस पकड़ा जाना इसका प्रमाण है कि किस स्तर का गडबड़झाला चल रहा है।
मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच करने वाला विभाग बरामदगी तो कर रहा है, मगर धंधेबाजों तक उनकी पहुंच नहीं बन पा रही है। बतया जा रहा गुमनाम खोआ और मिठाई मंगाने के पीछे भी साजिश है। क्योंकि न पकड़े जाने का डर है और न ही जांच का झंझट। ऐसे में बेहद सावधान होकर खोआ, पनीर और मिठाइयां इस्तेमाल करना होगा।
दूध से तैयार होने वाले उत्पाद में बड़ा झोल है। बाजार में नकली खोआ, बर्फी, मिल्क केक, अफलातून मिठाई के अलावा मिलावट वाला बूंदी लड्डू की भरमार है। धंधेबाज कानपुर, गोंडा के नवाबगंज, मथुरा की मंडी से इन सामग्रियों को गुमनाम मंगा रहे हैं। यहां माल पहुंचते ही गोदामों में बंद कर दिया जा रहा है। इसके बाद धंधेबाज मौका देखकर चौका लगा रहे हैं।
एक दिन पहले रोडवेज पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम पहुंची तो कानपुर की एक लोडर वाहन पर डेढ़ क्विंटल खोआ और 10 किग्रा सफेद बर्फी बंडलों में बरामद हुई। इसकी कीमत साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक आंकी गई। मौके पर इसका स्थानीय वारिस कोई नहीं मिला।
जबकि खोआ और बर्फी से लदा वाहन खोआ मंडी के पास पकड़ा गया। इससे यह बिल्कुल साफ हो गया कि यदि संबंधित खाद्य पदार्थ नकली नहीं होते तो इसके स्थानीय वारिस जरूर मिलते। साढे़ तीन लाख रुपये का यह माल यूं ही लावारिस हाल में नहीं छोड़ दिया जाता।
बहरहाल टीम को नकली-असली का यह खेल समझने में देर नहीं लगा और वाहन सहित खोआ, बर्फी जब्त कर ली गई। होली के दृष्टिगत पिछले एक माह से धंधेबाज सक्रिय हैं। मांग के हिसाब से नकली खोआ और मिठाई कानपुर, गोंडा के नवाबगंज और मथुरा से लगातार मंगाया जा रहा है। धंधेबाज अपने गोदामों में इसका भंडारण भी कर रहे हैं। यहां से छोटे दुकानदारों को आपूर्ति की जा रही है।
नकली खोआ, पनीर में पाम ऑयल का उपयोग ः जानकारों की मानें तो नकली खोआ और पनीर में दूध की मात्रा कम रहती है।
दूध का क्रीम और फैट निकालकर पाम ऑयल मिलाकर खोआ, पनीर तैयार किया जाता है। इसमें दूधिया सुगंध के लिए सेंट का इस्तेमाल किया जाता है। नकली खोआ में सफेदी ज्यादा होती है। जबकि असली खोआ सोंधापन के साथ हल्का लाल दिखता है।
पाम ऑयल मिला दूध खाने के नुकसान ःजिला चिकित्सालय के फिजिशियान डाॅ. रामजी सोनी ने बताया कि पाम ऑयल का सेवन ट्राइग्लिसराइड्स सहित अन्य ब्लड लिपिड पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल हाई होने से ब्लड वेसेल्स सख्त होने लगती है। इससे ब्लड सर्कुलेशन में दिक्कत आती है, जो हार्ट के लिए खतरनाक है।
पाम ऑयल के बहुत ज्यादा सेवन से लीवर डैमेज होने का भी खतरा बना रहता है। क्योंकि लीवर को सैचुरेटेड फैट को डाइजेस्ट करने के लिए जरूरत से ज्यादा काम करना पड़ता है।