बस्ती। कलवारी-टांडा पुल के मरम्मत कार्य में लेटलतीफी अब भारी पड़ रही है। छह महीने से लुंबिनी-दुद्धी हाईवे का आवागमन टांडा से बस्ती सीमा तक ठप है। 2200 मीटर लंबे इस पुल के फासले पर स्थित पड़ोसी जनपद अंबेडकर पूरी तरह कट गया है। जबकि एनएचएआई ने पुल मरम्मत के लिए महज दो महीने का ही वक्त मांगा था। छह महीने बीतने के बाद भी मरम्मत कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। इसके चलते इन जिलों के बीच आपस में संचालित होने वाली व्यवसायिक गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं।
बता दें कि आजमगढ़, बनारस, मऊ, जौनपुर, सुलतानपुर समेत कई जिलों को आपस में जोड़ने वाला कलवारी-टांडा पुल कमजोर हो चुका था। एनएचएआई ने बस्ती और अंबेडकरनगर जिला प्रशासन से दो महीने तक लुंबिनी-दुद्धी मार्ग का आवागमन ठप कर इस पुल के मरम्मत कार्य की अनुमति ली थी। सितंबर 2025 में मरम्मत कार्य प्रारंभ हुआ, उम्मीद थी कि नवंबर 2025 तक काम पूरा कर आवागमन चालू करा दिया जाएगा। मगर मरम्मत कार्य लंबा खींचने के चलते अब तक मरम्मत कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। अब तो यह पुल पूर्वांचल के कई जिलों में चर्चा की विषय बन गया है।
बस्ती से पड़ोसी जनपद अंबेडकरनगर में लोग अपने रिश्तेदारी तक नहीं कर पा रहे हैं। दोनों जनपदों में इधर से उधर होकर व्यवसाय करने वालों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। आमजगढ़, बनारस, मऊ, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज तक के लोग इस रास्ते बस्ती पहुंचते रहे। अब लोगों को आने-जाने के लिए अपने परिचितों से इस पुल के चालू होने की जानकारी लेनी पड़ रही है। बनारस में नौकरी करने वाले बस्ती के दिलीप त्रिपाठी कहते हैं कि पिछले छह महीने से उन्हें बिड़हरघाट होकर आजमगढ़ के रास्ते बनारस जाना पड़ रहा है। इससे बनारस पहुंचने में समय भी दो घंटे अधिक लग रहा है और 70 किमी दूरी भी अधिक तय करनी पड़ रही है। गोरखपुर से होकर बनारस जाने पर 150 किमी अधिक दूरी तय करनी पड़ती है।
वहीं पिकौरा शिवगुलाम के रहने वाले मनीष शुक्ल बताते हैं कि मरम्मत कार्य में इतना समय नहीं लगना चाहिए। निर्माण कंपनी ने खुद दो महीने में मरम्मत करके पुल चालू करने का दावा किया था। छह महीने बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस है। इससे पूर्वांचल के आधा दर्जन जनपदों को ट्रांसपोर्ट व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। बस्ती, बनारस, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ आदि जनपदों को आपस में चलने वाला कारोबार प्रभावित है। लंबी दूरी तय करके गाड़ियों को एक दूसरे जिले में पहुंचने से तेल का खर्च बढ़ रहा है। इससे संबंधित जनपदों के लोग से बचने के लिए बस्ती जिले से अपना कारोबारी नाता तोड़ रहे हैं। यहां की राइस, फ्लोर मिल में कच्चे मॉल के रूप में गेहूं, धान एवं अन्य सामग्रियों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
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टोल प्लाजा की आमदनी हुई कम
कलवारी-टांडा पुल मरम्मत कार्य के चलते लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर खड़ौआ के पास स्थापित टोल प्लाजा की आमदनी घटकर आधे से भी कम हो गई है। टोल कर्मियों के अनुसार पुल चालू होने के दौरान इस हाईवे से प्रत्येक चौबीस घंटे में 6 से 10 हजार गैर जनपद की गाड़ियों का आवागमन होता रहा। इस मार्ग से माल वाहन सीधे नेपाल तक पहुंचते रहे। उस समय टोल वसूली 2 से 3 लाख की हो रही थी। अब प्रतिदिन की वसूली घटकर 15 से 20 हजार रुपये हो गई है। टोल कंपनी लगातार घाटे में जा रही है।
सिर्फ निकल पा रहे दो पहिया वाहन
पुल पर इस समय अंतिम लेयर (फाइनल लेयर) डालने का कार्य जारी है। मरम्मत कार्य में लगे कर्मचारियों के अनुसार अभी भी फाइनल कोट चढ़ाने का काम बचा हुआ है। 2200 मीटर लंबे इस पुल पर फिलहाल दो पहिया वाहनों के आवागमन की अनुमति दी गई है। इससे स्थानीय लोगों को कुछ राहत मिली है, हालांकि चार पहिया और बड़े वाहनों को अभी कब तक इंतजार करना पड़ेगा कुछ कहा नहीं जा सकता है।
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लोग बाेले-
कलवारी-टांडा पुल मरम्मत कार्य देरी के चलते हम लोग बगल के जनपद अंबेडकरनगर में रिश्तेदारी करने नहीं जा पा रहे हैं। सहालग के सीजन में कई निमंत्रण छूट गए हैं। छह महीने से हम लोगों का आवागमन बिल्कुल नहीं हो पा रहा है। आवागमन ठप होने से बस्ती से कलवारी के बीच दो दर्जन से अधिक ढाबे और होटल बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
-सुरेश सिंह, कलवारी।
पुल मरम्मत के नाम पर भी सिर्फ खिलवाड़ किया जा रहा है। दो महीने की जगह छह महीने बीत गए अभी तक पुल चालू नहीं किया गया। पहले आवागमन बहाल होने से कलवारी, कुशौरा, नगर बाजार में लोग रुकते थे। चहल-पहल के साथ व्यवसाय भी अच्छा होता था।
-दिलीप श्रीवास्तव, भोयर।
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कोट
कलवारी-टांडा पुल के मरम्मत का कार्य लगभग अंतिम चरण में है। कार्य की गुणवत्ता पर विशेष फोकस दिया जा रहा है। इसलिए थोड़ा विलंब हो रहा है। निर्माण एजेंसी को बहुत जल्द कार्य पूरा करने की हिदायत दी गई है।
-ललित प्रताप, परियोजना प्रबंधक, एनएचएआई।