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Basti News: मुफलिसी दूर करने को समूह से जुड़ीं, बन गईं 89 लाख की कर्जदार

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समूह के नाम पर कर्जदार बनीं सियरापार गांव की मीरा, सुनीता और निर्मला- संवाद
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- सियरापार गांव की 30 से ज्यादा महिलाएं हुईं जालसाजों की शिकार
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- समूह बनाकर महिलाओं के नाम पर कई बैंकों से ले लिया गया लोन



- अब बैंकों से आ रहे वसूली की नोटिस तो हराम हो गई नींद, परिवार में कलह

संवाद न्यूज एजेंसी



बस्ती। सूदखोरी साहूकारी के जंजाल से जरूरतमंद गरीब परिवारों को छुटकारा दिलाने के लिए बनाए गए स्वयं सहायता समूह की परिकल्पना की जालसाजों ने ऐसी धज्जियां उड़ाईं कि सैकड़ों महिलाएं लाखों की कर्जदार बन गईं। परिवार को मुफलिसी के दौर से बाहर निकालने की ललक वे समझ नहीं पाईं कि उनके साथ कितना बड़ा खेल हो रहा है। अब बैंकों से एक-एक करके नोटिस आ रहे हैं। तो उनके पैरों तले जमीन सरकती जा रही है। इस कारण घर में कलह हो रहे हैं। वसूली एजेंट आकर घर पर धमकी देकर जा रहे हैं।

ऐसा ही खेल शहर से सटे सियरापार गांव की 30 से ज्यादा महिलाओं के साथ हो गया। इन महिलाओं के नाम पर विभिन्न बैंकों के 89 लाख रुपये कर्ज चढ़ गए हैं। उन्हीं महिलाओं में शामिल मीरा देवी, निर्मला, सुनीता ने बताया कि गांव का अनिल, अरविंद सोनी और उसका रिश्तेदार रवि लोगों के पास 11 फरवरी 2022 को आए। लालच दिया कि समूह में शामिल हो जाओगी तो बकरी पालन, गाय पालन जैसे छोटो-मोटे रोजगार के लिए बिना ब्याज के जितना चाहोगी उतना लोन मिल जाएगा।
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इन सबने लोन लेने से इन्कार किया तो वे कहने लगे कि लोन के रुपये उन्हें दे देना, वे ब्याज और मूल धन जमा करते रहेंगे। इसके बदले उन्हें हजार-दो हजार रुपये दे दिए। इसी दो हजार की लालच में उन लोगों के कई बार हस्ताक्षर बनवाए और आधार, पैन कार्ड की फोटो कॉपी ले गए। अब मीरा पत्नी राम शंकर के नाम पर दो लाख रुपये, निर्मला पत्नी गाेमती के नाम पर 1.80 लाख, सुनीता पत्नी शिव प्रसाद के नाम पर 1.50 लाख रुपये की कर्जदार हैं।
इन लोगों ने बताया कि उन्हें दो-चार बार बैंक में ले जाया गया। कई बार बैंक के लोग घर पर ही पहुंच जाते थे। उनके परिवार में इसे लेकर झगड़े होने लगे हैं। अब वे न्याय के लिए पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं।





कहा था जिंदगी बदल जाएगी, बना दिया कर्जदार



मीरा बताती हैं कि अब तो वसूली करने वाले आकर घर पर अपमानित करने लगे हैं। एक एजेंट को उन लोगों ने दौड़ा लिया था। निर्मला ने बताया कि वह सोच रही थीं कि अब जिंदगी बदल जाएगी, लेकिन कर्जदार बन गईं। सुनीता का भी यही कहना है। ऊषा देवी, राजेश्वरी, मीना, सुमन, ज्योति आदि ने शिकायती पत्र दिया था, जिसमें लिखा है कि वह स्वरोजगार के लिए समूह बनाकर कार्य करती हैं। गांव की मीना गनेशपुर टोला घमुआ थाना वाल्टरगंज के रहने वाले पति राकेश, अरविंद, सोनी, रवि को लेकर 11 फरवरी 2022 को गांव आईं। इसके बाद अनिल निवासी चमरौहा भी आया। समूह की सभी महिलाओं को फोटो लेकर बैंक गया। इसके बाद बैंक में समूह का खाता खुला। सबके एकाउंट में लोन के रुपये आ गए। बताया कि रुपये आने के बाद मीना आदि आती थीं और बैंक ले जाकर पैसा निलवाकर खुद रख लेती थीं। इस तरह इन लोगों ने 50 लाख रुपये की ठगी की।

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18 बैंकों से निकाल ले लिया ऋण
जालसाजों ने गांव की महिलाओं को एक दो नहीं बल्कि आधा दर्जन बैंकों का कर्जदार बना दिया। मीरा, सुनीता और निर्मला ने बताया कि उनके नाम पर छह बैंकों से लोन लिया गया है। इन तीनों ने बताया कि गांव की यशोदा पत्नी राम किशुन के नाम पर 18 बैंकों से लोन निकाल लिया गया। इनमें बंधन बैंक, भारत बैंक, वंदना बैंक, मिड लैंड, कमल बैंक, एक्सिस बैंक, ग्रामीण कोटा, सामदूजा बैंक, उत्कर्ष बैंक, आईडीएफसी बैंक, एचडीएफसी बैंक, आरबीएल बैंक, टाटा बैंक से लोन करवाए गए।





बैंकों की मिलीभगत से पास हुआ लोन
अधिवक्ता विवेक मणि बताते हैं कि इस तरह की जालसाजी बिना बैंक वालों के मिले नहीं हो सकती। कारण यह कि एक बैंक से कर्ज देने के बाद दूसरे से कर्ज लेने के लिए एनओसी ली जाती है। बिना एनओसी सत्यापन के लोन नहीं दिया जाता है। इन महिलाओं के नाम पर कई बैंकों से कर्ज हुआ है, तो बिना बैंक की मिलीभगत से ऐसा नहीं हो सकता है।





कलक्ट्रेट में किया था प्रदर्शन

सोमवार को समूह के कर्ज से परेशान महिलाओं ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया था। सरदार सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश पटेल और सर्वेश चौधरी के नेतृत्व में जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा था, जिसमें कहा कि समूह की महिलाओं को भ्रम में रखकर उनके नाम पर कर्ज लेकर डकार जाने वाले लोगों को चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाए और पीड़ित धोखाधड़ी की शिकार हुई महिलाओं का धन वापस कराया जाए। इस मौके पर आकाश चौधरी, अभिषेक चौधरी, संदीप निषाद, ज्योति, मीरा, चंद्रगुप्त मौर्य, अखिलेश प्रजापति, रागिनी देवी, संतोष चौधरी, ऊषा देवी, राजेश्वरी, शहजाद आलम, मनोज निषाद, प्रमोद यादव, मंजीत यादव आदि शामिल रहे।
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कोतवाली में दर्ज है केस

मार्च में बैंकों से नोटिस आने का सिलसिला शुरू हुआ तो पीड़ित महिलाओं ने भागदौड़ शुरू की। एक बार तो समझौता करा दिया गया, मगर जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो महिलाएं डीएम के पास पहुंचीं और प्रार्थनापत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। इसके बाद पुलिस ने ऊषा पत्नी रामअजोर आदि की ओर से दी गई तहरीर पर मीना, राकेश अरविंद, सोनी निवासी ग्राम दक्षिणद्वारा गनेशपुर थाना वाल्टरगंज, अनिल निवासी ग्राम चमरौहा सियरापार थाना कोतवाली, रवि पता अज्ञात पर धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया। कोतवाल राना डीपी सिंह ने बताया कि आरोपियों की तलाश की जा रही है।



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कोट...



इस तरह की शिकायत अभी पास नहीं आई है। ज्ञापन देने की जानकारी मिली है। इस पर जांच कराई जाएगी कि आखिर समूह के नाम पर यह गोलमाल कैसे हो गया।

-प्रतिपाल चौहान, एडीएम
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