सियासी पारा चढ़ा, ढूंढे नहीं मिल रहे सदस्य
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव : नाम वापसी पर टिकीं हैं सबकी निगाहें
सपा जिलाध्यक्ष पर कलवारी थाने में 23 दिन के भीतर दर्ज हुआ दूसरा मुकदमा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव को लेकर जनपद में सियासी पारा तेजी से चढ़ रहा है। एक ओर भाजपा हर हाल में अपने प्रत्याशी को जिताने की कोशिश में है। दूसरी ओर सपा मैदान में डटे रहना चाहती। कोशिशों की इस व्यूह रचना में मंगलवार का दिन (नाम वापसी- सुबह 11 से दोपहर तीन बजे) खासा अहम रहने वाला है।
सूत्रों के अनुसार, व्यूह रचना के क्रम में भीतर ही भीतर भाजपा सपा उम्मीदवार का नामांकन वापस कराने के प्रयास में भी है। जिससे पार्टी प्रत्याशी निर्विरोध हो जाए। पार्टी के नेता चुनाव जीतकर अपना 20 साल का वनवास खत्म करना चाहते हैं। इसकी पुरजोर कोशिश हो रही है। ऐसे में मंगलवार को नाम वापसी का दिन जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर आगे के सियासी बयार का रुख तय करेगा। फिलहाल सत्ताधारी दल भाजपा से लेकर अन्य दलों के जिला पंचायत सदस्य भूमिगत हो गए हैं। वे खोजे नहीं मिल रहे।
भाजपा जिलाध्यक्ष महेश शुक्ल का दावा है कि पर्चा वापस हो या न हो, लेकिन जीत भाजपा उम्मीदवार की ही होगी। उनका तर्क है कि पार्टी के समर्थन से जीते नौ के अलावा अन्य कई जिला पंचायत सदस्य उनके संपर्क में हैं। वहीं, सपा जिलाध्यक्ष महेंद्र नाथ यादव ने कहा कि उनके उम्मीदवार और जिला पंचायत सदस्यों का उत्पीड़न किया जा रहा है। फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। मगर सपा किसी भी कीमत पर चुनाव लड़ेगी। उम्मीदवार की ओर से पर्चा वापसी का तो सवाल ही खड़ा नहीं होता है।
वहीं, सपा जिलाध्यक्ष पर 23 दिन के भीतर एक और मुकदमा दर्ज होने से सियासी घेरेबंदी और तेज होने के आसार बढ़ गए हैं।
सपा प्रत्याशी, दो प्रस्तावक भूमिगत, तीनों के गनर निलंबित
सपा उम्मीदवार वीरेंद्र चौधरी और उनके दो प्रस्तावक शंकर यादव व राज बहादुर शनिवार शाम से गनर को छोड़कर भूमिगत हैं। पूरे मामले में पुलिस अधीक्षक ने लापरवाही बरतने के आरोप में तीनों के गनर गोपाल मिश्र, अमित कुमार यादव व राजेश कुमार को निलंबित भी कर दिया है। रविवार को पूरे दिन प्रशासन की टीम सपा प्रत्याशी के गोटवा स्थित भट्ठे पर पूरे दिन बैठी रही और उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। जब वह नहीं मिले तो उनके गनर से संपर्क किया गया तो वह उनके साथ नहीं मिलेे। अपर पुलिस अधीक्षक दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि तीनों गनर संबंधित व्यक्तियों के साथ नहीं पाए गए थे। उन्हें निलंबित कर दिया गया है। वहीं प्रत्याशी और प्रस्तावकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है।