बस्ती। जिले में जल जीवन मिशन सिर्फ कागजी घोड़ा बनकर दौड़ रहा है। अधिकतर गांवों में टोटियां पानी नहीं उगल रहे हैं। कभी टोंटी चोरी चर्चा में रहा तो अब टोंटी से पानी गायब होने का मामला सुर्खियां बटोर रहीं हैं।
पूर्ण परियोजनाओं से भी हर घर जल नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसे में ग्रामीण हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौत के बाद भी विभाग की नींद नहीं खुल रही है। जल जीवन मिशन विभाग का दावा है कि जिले में 194 गांवों में जलापूर्ति की जा रही है। विभाग के अनुसार, जिले में 855 पानी की टंकियां बननी हैं।
इनमें से 194 टंकियों से पानी की आपूर्ति शुरू करने का दावा किया जा रहा है। जिले में 8,3038 मीटर पाइप लाइन बिछाई जानी है। अब तक आठ हजार से अधिक मीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। हालांकि, विभाग के दावे पर ग्रामीण सवाल खड़ा कर रहे हैं। गौर ब्लाॅक के सोहन का कहना है कि उनके गांव में पानी की टंकी तो बन चुकी है, मगर जलापूर्ति अब तक शुरू नहीं हो पाई है।
इतना ही नहीं, आए दिन यह खबर आती रहती है कि जलापूर्ति के लिए बिछाई गई पाइपलाइन जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने के कारण घरों में पानी आना बंद हो गया है। 2028 तक जिले के हर गांव में जलापूर्ति का लक्ष्य तय किया गया है, मगर विभागीय गति को देखते हुए लगता है कि समय से पहले काम पूरा नहीं हो पाएगा। बार-बार चेतावनी के बाद भी जल जीवन मिशन अधूरा रह गया। पांच साल बीत गए मगर, अब तक जिले के अधिकतर गांवों में हर घर पानी नहीं पहुंचा है।
मिशन की 50 प्रतिशत परियोजनाएं पूर्ण नहीं हो पाई हैं। अब तक 2578 गांवों को इस योजना से आच्छादित हो जाना था। इसके लिए 855 परियोजनाएं स्वीकृति हुई थीं। इसमें सिर्फ 194 परियोजनाएं पूरी हुई हैं। कहीं चहारदीवारी का कार्य शेष है तो कुछ बोरिंग एवं पाइप लाइन बिछने के इंतजार में हैं। शासन के निर्देश पर इन परियोजनाओं को मार्च 2024 तक पूर्ण कर हर घर नल से जल पहुंचाना था।
इसके लिए डीएम एवं कमिश्नर स्तर से बार कार्यदायी एजेंसी तथा निर्माण कंपनी को बार-बार चेतावनी दी गई। जिन जगहों पर जमीन विवाद थे, वहां एसडीएम स्तर के अधिकारी खुद हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
गौर ब्लॉक में सिर्फ कागजों में गढ़ी गई स्वच्छ पेयजल परियोजना की कहानी : गौर ब्लॉक के मदनपुरा ग्राम पंचायत में जल जीवन मिशन योजना में बड़ा खेल सामने आया है। यहां दो करोड़ 58 लाख 4422 रुपये लागत की स्वच्छ पेयजल परियोजना की कहानी सिर्फ कागजों में गढ़ी गई। धरातल पर ग्रामवासियों के घर बूंद भर पानी नहीं पहुंचा।
वर्ष 2023 की यह परियोजना आधे-अधूरी स्थिति में छोड़कर जिम्मेदार गायब हो गए। कार्यस्थल पर निर्माण कार्य का विवरण लिखा हुआ बोर्ड लगाकर कार्य पूर्ण दर्शा दिया गया है। दो साल पहले इस ग्राम पंचायत के दो गांव के 2582 परिवारों के लिए हर घर जल योजना के साथ पहले पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू हुआ।
परियोजना के तहत पहले चरण में 8752 मीटर पाइपलाइन बिछानी थी। इसके अलावा हर घर पानी का कनेक्शन देने के लिए टोटियां लगवाई जानी थी। ग्रामीणों के अनुसार शुरूआत में निर्माण कंपनी ने आधे दूरी में पाइप लाइन बिछाई गई। इसमें मदनपुरा के ज्यादातर हिस्से में पाइप लाइन बिछ गई है। जबकि दूसरे गांव सुकरौली में पाइप लाइन बिछनी अभी बाकी है। मदनपुरा के अधिकांश घरों पर चबूतरे के साथ टोंटियां भी लगवाई गई। अजगैवाजंगल की आधी आबादी को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं : टिनिच। सल्टौआ ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत अजगैवाजंगल की आधी आबादी को आज भी शुद्ध पेयजल नसीब नहीं है। लोगों को हैंडपंप का पानी पीना पड़ रहा है। ब्लॉक क्षेत्र के अजगैवाजंगल की आबादी 12 हजार से अधिक है।
यह ग्राम पंचायत आठ किमी लंबाई में बसा है। यहां शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2012-13 में राजस्व गांव भदना में ओवरहेड टैंक का निर्माण कराया गया था। इससे 46 पुरवों तक ही पानी की सप्लाई दी गई। जबकि आठ पुरवों में पाइप लाइन नहीं पहुंचाई गई। ओवरहेड टैंक गांव के पूरब में बनने के कारण गांव आधे हिस्से तक ही पानी पहुंच पाता है।
गांव के गणेश का कहना है कि पानी की टंकी दूर होने से सप्लाई आठ पुरवों तक नहीं पहुंच पा रही है। ऑपरेटर बाल मुकुंद पांडेय ने बताया कि टंकी से सुकरौली तक पांच किलो दूरी है। लिहाजा वहां तक पानी की आपूर्ति करना संभव नहीं है। जल निगम के जेई अश्विनी भार्गव ने बताया की टेंडर हुआ है। नालंदा कंपनी को ठेका मिला है। डीपीआर बनाकर शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही कंपनी काम शुरू कर देगी। संवाद