भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अफसर बताकर लोगों को अर्दब में लेने वाला जालसाज पुलिस के हत्थे चढ़ गया। आजमगढ़ जिले का मूल निवासी यह शख्स खुद को महाराष्ट्र कैडर का आईपीएस बताकर यूपी ही नहीं बल्कि हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड के कई अधिकारियों को फोन पर हड़का चुका है। बड़े नेताओं से नजदीकी बताकर इसने विधानसभा चुनाव में टिकट दिलाने के नाम पर भी ठगी की। पुलिस को इसके पास से तीन सिमकार्ड और कई फर्जी अभिलेख भी बरामद किए गए। जिनमें एक प्रेस कार्ड भी मिला है, जो इसकी पत्नी के नाम है।
एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि तीन-चार दिन पहले उसने कोतवाली क्षेत्र के मूड़घाट स्थित कबीर मठ की कथित विवादित जमीन के संबंध में एक पक्ष की ओर से पैरवी की। लेकिन जब लगातार दबाव बनाने लगा तो शक हुआ। बकौल एसपी अमूमन हायर लेबल से कोई भी जनप्रतिनिधि या अफसर दबाव नहीं बनाते। शक होने पर एएसपी रोहित मिश्र के नेतृत्व में सीओ सिटी एसएन सिंह, कोतवाल कपिल मुनि सिंह के अलावा एसआई अनिल कुमार, नरसिंह यादव, भगवान दास यादव व साइबर सेल के हिंदे आजाद व कांस्टेबल सर्वेश नायक, कांस्टेबल जनार्दन प्रजापति ने छानबीन की तो वह अफसर फर्जी निकला। उसकी पहचान आजमगढ़ जिले के थाना अतरौलिया के भानीपुर निवासी अनिल मिश्रा के रूप में की गई। उसकी तलाश में टीमें जुट गईं। शुक्रवार को वह मूड़घाट पर अपने क्लाइंट से मिलने पहुंचा तभी कोतवाली पुलिस ने दबोच लिया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि फर्जी पुलिस अधिकारी/प्रेक्षक बनकर अधिकारियों को फोन करता था। उन्हें गुमराह करके ठगी करता था। एसपी ने बताया कि कोतवाली में इसके खिलाफ फ्राड, जालसाजी, फर्जी अभिलेख तैयार करने संबंधी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।