बस्ती। परशुरामपुर थाने में तैनात अजय गौड़ की रहस्यमयी मौत पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है। 10 दिन बीत जाने के बाद भी जांच किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। पुलिस न तो इसे खुदकुशी बता रही है और न ही हत्या। वह दोनों आशंकाओं पर होमवर्क करने में जुटी है, मगर उसका पूरा फोकस खुदकुशी की ओर ही है।
हालांकि, दरोगा के एडीएम भाई अरुण गौड़ भाई की मौत को खुदकुशी मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि यह एक सुनियोजित हत्या है। इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। उधर, बाइक लाने वाले शख्स की तलाश में पुलिस ने मंगलवार को खलीलाबाद में दबिश दी, मगर कामयाबी नहीं मिल पाई।
सूत्र बताते हैं कि पुलिस लगभग-लगभग अपना होमवर्क पूरा कर चुकी है। सिर्फ डायटम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, ताकि उसमें खुदकुशी के कुछ क्लू मिल जाय और पुलिस रिपोर्ट का हवाला देकर दरोगा की मौत के रहस्य से पर्दा उठाकर वाहवाही लूट ले। इस मामले पर अब पुलिस अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। कल तक प्रगति की जानकारी देने वाले अफसर कुछ भी बोलने से कतराने लगे हैं। दरोगा के एडीएम भाई के कड़े तेवर को देख पुलिस इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है, ताकि मामला यदि सीबीआई के पास जाए तो उनकी गर्दन न फंसे। दरोगा का पर्सनल मोबाइल भी मिल चुका है। इसका डाटा रिकवर कराने की कोशिश की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि दरोगा के पर्सनल मोबाइल के कुछ डाटा पुलिस के हाथ लग गए हैं, मगर जानकारी नहीं दी जा रही है। सूत्र यह भी बताते हैं कि दरोगा प्रकरण की शुरुआत छानबीन में लगी हर्रैया सर्किल की पुलिस टीम को इससे दूर कर दिया गया है।
अब वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में पांच टीमें इस पर काम कर रही हैं। इस टीम में एसओजी, स्वॉट, क्राइम ब्रांच के अलावा डीआईजी और एसपी कार्यालय में तैनात दरोगाओं को लगाया गया है।
पांच टीमें अलग-अलग दिशाओं में काम कर रही हैं। सभी के काम बांट दिए गए हैं। बाइक लाने वाले शख्य की तलाश में एसओजी और क्राइम ब्रांच की टीम लगाई गई है। सूत्र बताते हैं एसओजी और क्राइम ब्रांच की टीम को बाइक लाने वाला शख्स लगातार गच्चा दे रहा है।
वह अपने पास मोबाइल भी नहीं रखता है। इसलिए पुलिस को कभी अंबेडकरनगर तो कभी खलीलाबाद की खाक छाननी पड़ रही है।