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निषेधाज्ञा तोड़ने वाले 77 गिरफ्तार

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निषेधाज्ञा तोड़ने वाले 77 गिरफ्तार
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बस्ती। कोरोना महामारी के संक्रमण काल के दौरान लागू निषेधाज्ञा को धता बताकर मनमानी करने वालों पर पुलिस की सख्ती बढ़ती जा रही है। इसे लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें सोमवार रात तक कुल 26 मुकदमे दर्ज किए गए। जिले के 16 थानों में दर्ज इन मुकदमों में 77 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सभी को थाने से निजी मुचलके पर जमानत दी गई, मगर हिदायत दी गई कि वह दोबारा अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। इन सभी ने अनावश्यक भीड़ लगाकर संक्रमण की संभावना को बढ़ाने की कोशिश की।
पिछले दो दिनों से बड़ी संख्या में दिल्ली-मुंबई, गुजरात आदि महानगरों से लोग बड़ी संख्या में लोग अपने गांव-घर पहुंच रहे हैं। इनमें से किसकी जांच हुई या नहीं, इसका कोई लेखाजोखा नहीं है। इस बीच गांव-कस्बों के लोग मौका देखकर बाहर घूमने-टहलने निकल रहे हैं। अगर कहीं कोई दुकान खुली मिल जाए तो कुछ देर में ही लोग भीड़ लगा दे रहे हैं। ऐसे में बहुत बड़ा जोखिम यह है कि यदि उस भीड़ में कहीं बाहर से आया संक्रमित व्यक्ति पहुंच गया तो सारे किए कराए पर पानी फिर जाएगा। इस संवेदनशीलता के बीच व्यवस्था कायम रखना बड़ी चुनौती है।
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एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि किसी को असुविधा न हो और सभी सुरक्षित रहें यह पुलिस का लक्ष्य है। अगर बार-बार कोई लॉक डाउन को अनावश्यक रूप से भंग करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उक्त कार्रवाई में पुलिस निषेधाज्ञा उल्लंघन का मुकदमा दर्ज कर रही है। लॉकडाउन की घोषणा के साथ महामारी कानून 1997 लागू किया गया है। इसी कानून में अगर लॉकडाउन में सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का कोई व्यक्ति उल्लंघन करता है, तो उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत कार्रवाई किए जाने का प्राविधान है। किसी के ऊपर यह धारा लगाने के लिए यह जरूरी नहीं कि उसके द्वारा नियम तोड़े जाने से किसी का नुकसान हुआ या नहीं। अगर सरकार द्वारा जारी निर्देशों की जानकारी होने के बावजूद उनका उल्लंघन कर रहे हैं, तो भी धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यदि संबंधित व्यक्ति की हरकत से कानून व्यवस्था में लगे शख्स को नुकसान पहुंचता है, तो कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है। साथ ही यदि सरकार के आदेश का उल्लंघन किए जाने से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा आदि को खतरा होता है, तो कम से कम छह महीने जेल या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।
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