बताया कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण उनका मुनाफा घट रहा है। बढ़ती लागत के बीच व्यापार संचालन करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि महंगाई पर नियंत्रण पाया जा सके और व्यापारियों को राहत मिल सके।
व्यापारी राकेश ने बताया कि पेट्रोल-डीजल के लगातार बढ़ते दामों ने आम आदमी के साथ-साथ व्यापारियों की भी कमर तोड़ दी है। ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ रहा है, जिसका सीधा असर किराना कारोबार पर पड़ रहा है। गौरव गुप्ता कहते हैं कि पेट्रोलियम के बढ़ते दामों का असर छोटे व्यापारियों के कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है।
जूता और बैग के सामान की ढुलाई महंगी होने से लागत बढ़ गई है, जबकि ग्राहकों की खरीदारी क्षमता भी प्रभावित हो रही है। महंगाई बढ़ने से लोग जरूरी सामान पर ही खर्च कर रहे हैं, जिससे बाजार में बिक्री कम हुई है। सरकार को बढ़ती ईंधन कीमतों पर जल्द नियंत्रण करना चाहिए, ताकि व्यापारियों और आम जनता को राहत मिल सके।
शिवम ने बताया कि बढ़ते दामों का सबसे ज्यादा असर फल कारोबार पर पड़ रहा है, क्योंकि फल पूरी तरह ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर निर्भर होते हैं। डीजल महंगा होने से मंडियों से माल लाने का खर्च बढ़ गया है, जिससे फलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो रही है।
इसका असर व्यापारियों के साथ-साथ आम ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। परमात्मा प्रसाद ने बताया कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों का सीधा असर खेती-किसानी और बीज कारोबार पर पड़ रहा है। माल ढुलाई महंगी होने से बीज, खाद और कृषि उपकरणों की लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका बोझ आखिरकार किसानों पर पड़ता है।
पहले ही किसान महंगाई और मौसम की मार झेल रहे हैं, ऐसे में ईंधन के बढ़े दाम उनकी परेशानियां और बढ़ा रहे हैं। केला, लीची व सेब व आनार पर भी असर पड़ा है। खाड़ी देशों से आने वाले ड्राई फ्रूट्स पर काफी असर दिख रहा है।