बालू माफिया से सांठगांठ के आरोप में लगाए जा चुके हैं छावनी के थानेदार
एनजीटी के निर्देश की उड़ रहीं धज्जियां
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरयू नदी के तटीय गांवों में अवैध बालू खनन से बीडी बंधा के लिए खतरा उतपन्न कर रहा है। अवैध खनन के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए बने बीडी बंधे पर दबाव बढ़ जाता है। बालू माफिया, पुलिस व खनन विभाग की तिकड़ी के कारण अवैध खनन फलफूल रहा है। यही नहीं दो दिन पहले बालू माफिया से सांठगांठ में एसपी ने थानाध्यक्ष छावनी को हटा दिया है।
सदर तहसील के तटीय गांव गंगापुर, माझाकला, माझाखुर्द सहित आदि गांवों से रात में खनन का खेल शुरू हो जाता है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस प्रति एक ट्रैक्टर-ट्रॉली एक रात क लिए 1500 से 2000 रुपये किया जाता है। पांच माह पहले अवैध खनन का ऑडियो वायरल होने पर कलवारी थाने के तीन पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई हुई थी।
ग्रामीणों का कहना कि जब नदी का ज स्तर बढ़ा होता है तभी अवैध खनन बंद होता। उसके बाद हमेशा अवैध खनन होता है। अवैध खनन के कारण नदी की धारा लगातार आबादी की तरफ बढ़ रही है। खनन के कारण तट के किनारे बसे गांवों के नदी में विलय की आशंका बढ़ती जा रही है। अवैध खनन एनजीटी के निर्देश का खुला उल्लंघन है। एनजीटी ने सभी राज्य सरकारों को अवैध खनन पूरी तरह बंद करने के निर्देश दिए हैं। बावजूद इसके सरयू नदी के तट के गांवों में लगातार खनन हो रहा है। अवैध खनन से न केवल सरकार को राजस्व की हानि होती है, बल्कि इससे नदी की धारा बदलने का खतरा बना रहता है।
एएसपी ओपी सिंह ने कहा कि खनन को लेकर शासनादेश के मुताबिक पुलिस सीधा हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। ऐसा करने के कारण ही दो दिन पहले कार्रवाई हुई है। खनन के लिए एक विभाग बनाया गया है। कोई भी खनन करता है तो इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं मानी जानी चाहिए। यदि खनन की शिकायत के बाद विभाग कार्रवाई में पुलिस की मदद चाहेगा तो उसे सहायता दे दी जाएगी।