बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ओपीडी में इस समय कुछ मरीज ऐसे आ रहे हैं, जिन्हें बुखार व पाचन ठीक न होने की समस्या है। ऐसे मरीजों की जांच कराई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार समय से जांच के बाद इलाज शुरू होने पर समस्या ठीक हो जाएगी। तीन मरीजों में हिपेटाइटिस की पुष्टि हुई है। आमतौर पर यह बीमारी संक्रमित सुई के प्रयोग और संक्रमित रक्त चढ़ाने से होती है।
फिजिशियन डॉ. रजत पांडेय ने बताया कि बुखार और पाचन तंत्र ठीक नहीं होने पर जांच करवा लें। संक्रमित सुई, रक्त और असुरक्षित यौन संबंधों से लोग हेपेटाइटिस बी और सी के मरीज बन जाते हैं। निशुल्क जांच और इलाज की सुविधा से स्क्रीनिंग बढ़ी है। 250 मरीजों की स्क्रिनिंग की जा चुकी है। हेपेटाइटिस लीवर की वायरस जनित खतरनाक बीमारी है। खून की जांच से इसकी पहचान की जा सकती है। इसके अलावा लीवर फंक्शन टेस्ट, एंटीजन, एंटीबॉडीज टेस्ट और अल्ट्रासांउड के माध्यम से भी हेपेटाइटिस के सभी प्रकारों की जांच की जाती है ताकि पता चल सके कि कौन सा वायरस है और कितना एक्टिव है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डॉक्टर की सलाह पर तुरंत इलाज शुरू कर देना चाहिए।
लीवर का रखें ख्याल
-तैलीय भोज्य पदार्थों से दूरी बनाएं
-योग, व्यायाम और टहलने की आदत डालें
-शराव, तंबाकू और धूमपान की लत से तौबा करें
-पौष्टिक और सुपाच्य आहार लें, वजन नियंत्रित रखें
-केक, पेस्ट्री, चॉकलेट, अल्कोहल, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ के सेवन से परहेज करें
-किसी बीमारी का उपचार ले रहे हैं तो लीवर का भी ध्यान रखें।
बीमारी के मुख्य लक्षण
-जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द होना
-आंखों व त्वचा की रंगत पीली पड़ना
-बुखार आना या हल्का बुखार बना रहना
-लगातार वजन गिरना और उल्टियां होना
-भूख कम लगना या भोजन से अरुचि होना
-उल्टी में रक्त का आ जाना या चक्कर खाकर बेहोश हो जाना
-घबराहट होना, थकान महसूस करना और थोड़ा काम करने पर हांफने लगना