- बच्चों को शारीरिक व मानसिक रुप से दंडित नहीं कर सकेंगे शिक्षक
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अब वो दौर बीत गया जब किसी भी गलती या ठीक से पढ़ाई व काम पूरा न करने पर गुरुजी मुर्गा बनाकर डांटते-फटकारते थे। जरुरत पड़ने पर छड़ी से पीटकर बेंच पर खड़ा कर देते थे। इसके विरोध में छात्र न तो कभी कुछ बोल पाता और न ही अभिभावक कभी कोई शिकायत लेकर स्कूल जाते थे। लेकिन, अब ऐसा नहीं होगा, बदले सामाजिक परिवेश ने शिक्षकों के हाथ बांध दिए हैं। बच्चा पढ़ाई करे चाहे न करे, कक्षा में खूब उदंडता करे, पर गुरुजी उसे किसी प्रकार का दंड नहीं दे सकेंगे।महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने बीएसए को निर्देश दिया है कि प्राइमरी स्कूलों में अब बच्चों को किसी प्रकार का शारीरिक और मानसिक दंड नहीं दिया जाएगा। इसको लेकर शिक्षा विभाग ने नियम जारी किए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि शिक्षक, बच्चों को किसी भी प्रकार का शारीरिक व मानसिक दंड नहीं देंगे। वह बच्चों को डांटेंगे नहीं, मारेंगे नहीं, बेच पर खड़ा नहीं करेंगे, परिसर में दौड़ाएंगे नहीं। ऐसे में शिक्षकों के मन में बड़ा सवाल है कि उदंड व शरारती बच्चों से कि तरह से निपटेंगे। शिक्षकों के अनुसार, शहर में तो थोड़ा ठीक है, लेकिन ग्रामीण परिवेश में कई बार ऐसे शरारती बच्चे मिलते हैं, जिन्हें कंट्रोल करने के लिए कुछ न कुछ दंड देना जरूरी होता है।
महानिदेशक स्कूली शिक्षा से प्राप्त निर्देशों का शत प्रतिशत अनुपालन किया जाएगा। बच्चों को शारीरिक व मानसिक दंड न देने का निर्देश सभी शिक्षकों को दिया गया है।
अनूप कुमार, बीएसए।