शिया समुदाय के लोगों ने मुहर्रम पर जंजिरी मातम मनाया।
कौम की खातिर खुद की कुर्बानी देने का जज्बा पैदा करने वाले इस्लाम धर्म के सबसे अहम त्योहार मोहर्रम पर बुधवार को या हुसैन की सदाओं से माहौल गूंज उठा। एक ओर जहां सुन्नी समुदाय ने ताजिया रखकर करबला की कुर्बानी याद किया,वहीं सिया समुदाय ने छाती पीटकर मातम मनाया। शहर में दुर्गापूजा प्रतिमाएं स्थापित होने की वजह से सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। जिसका नतीजा रहा कि त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। जिले भर में स्थापित ताजिया सुपुर्दे कर्बला होने से प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
गांधीनगर में गुमनाम के नेतृत्व में ताजिया जुलूस निकाला गया। पक्के बाजार में पुलिस क्लब के पास घंटों जुलूस रुका रहा, जहां ताजियादरानों ने झूमकर ढोल-ताशे बजाए। गांधीनगर में प्रतिमाओं के सामने सफेद पट्टियां बना दी गई थीं, ताकि जुुलूस में शामिल गाजे-बाजे की टोली को तय नियम के तहत संचालित किया जा सके।
इस दौरान कमिश्नर दिनेश कुमार सिंह, डीआईजी लक्ष्मी नारायण पूरे मंडल के हालात का जायजा लेते रहे। डीएम नरेंद्र सिंह पटेल व एसपी कृपाशंकर सिंह ने तमाम क्षेत्रों का भ्रमण कर व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं भानपुर तहसील क्षेत्र के विभिन्न गावों में मुर्हरम के मेले का आयोजन हुआ। रामनगर कर्बला पर आयोजित मेले में रामनगर,चेरूईया, बारहकोनी, नरखोरिया, करैली, बेईली, वनवधिया की सौ से अधिक ताजियों को दफन किया गया। नौवागांव में भी मेले का आयोजन किया गया। इस दौरान ढोल, ताशा और झांझ बजाने वालों ने अपने करतब दिखाए।
दुबौलिया कस्बे में बुधवार को तिरंगे के साथ मोहर्रम का जुलुस निकाला गया। इसके जरिए संदेश देने का प्रयास किया गया कि हजरते इमामे हुसैन ने अपने पूरे कुनबे के साथ शहीद हो कर यजीद के आगे नहीं झुके। उसी तरह से अपने मुल्क हिन्दुस्तान की हिफाजत के लिए तमाम हिन्दू, सिक्ख, इसाई के साथ मुसलमान भी देश और अपने तिरंगे की आन, बान शान के में कभी कमी आने नहीं देगे। जुलूस में शामिल लोगों ने हिन्दुस्तान जिन्दाबाद और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए कर्बला की तरफ रवाना हुए। यह जानकारी दुबौलिया मुस्लिम वेलफेयर सोसाइट के अध्यक्ष अली जनाब तोराब अहमद अलवी ने दी।