अबीर-गुलाल उड़ाए, हर तरफ होली की धूम
बस्ती। रंगों का पर्व होली पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। एक दिन पहले से चारों ओर रंग, अबीर-गुलाल उड़ाए जा रहे हैं। बच्चे तो बच्चे, बडे़ भी अबीर-गुलाल के साथ ही पिचकारी लिए धमाल मचाते देखे जा रहे हैं। कुछ जगह शुक्रवार को ही होली मनाई गई, लेकिन अधिकतर स्थानों में शनिवार को रंग खेले जाएंगे।
बृहस्पतिवार को गांधीनगर की दुकानों पर ग्राहकों का रेला लगा रहा। देर रात तक खरीददारी होती रही। दो दिन होली होने का असर बाजार में भी देखने को मिला। सबके मन में होली को यादगार बनाने की तरकीब हिलोरें मार रही हैं। अपने अपने ढंग से बहुतायत लोगों ने जमकर होली मनाने में दो दिन पहले से ही जुटे हुए हैं। खोया और पनीर ने लोगों को खूब तंग किया। एक ओर नकली खोया पनीर के हौव्वे ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है, इसके लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। रोडवेज के खोयामंडी में छापे के डर से दुकानें बंद कर थी। मगर कुछ दुकानदार टहलकर चुनिंदा ग्राहकों को खोया पनीर मुहैया कराते देखे गए। दूध और खोए की मांग को देखते हुए तमाम चाय की दुकानों पर चाय की बिक्री बंद कर दी गई थी। होली के दौरान शराब की दुकानों पर भी पुलिस की निगाह है। होली के दोनों दिन जिले में मदिरा की बिक्री नहीं होने की बात कही जा रही है लेकिन चोरी-छिपे कई जगह शराब बिकती मिली। एसपी आशीष श्रीवास्तव ने लोगों से शांतिपूर्वक होली मनाने का आग्रह किया है।
हाई कैलोरी पकवान से बचें
होली रंगों, खुशियों और मस्ती का त्योहार है। इनके बीच पारंपरिक भोजन गुझिया, भुजिया, मट्ठी, पापड़, कचौड़ी जैसी चीजें बडे़ चाव से खाते हैं। लेकिन, इन सब में हाई कैलोरी होता है। यदि आप अपना वजह कंट्रोल करना चाहते हैं तो इनसे बचना होगा। डायटीशियन श्रुति मिश्रा का कहना है कि एक औसत वयस्क को प्रतिदिन 2000 कैलोरी की जरूरत होती है। लेकिन, त्योहार में इससे अधिक सेवन कर लेते हैं। गुझिया, दहीबड़ा, पापड़ खाएं लेकिन नियंत्रित मात्रा में। फलों का सलाद, पास्ता सलाद, दही, फल सब्जी की टिक्की और हरी चटनी, हल्के भुने बादाम, किशमिश और खूबानी भी अच्छा विकल्प हो सकता है।
हर्बल गुलाल से खेलें होली
होली के दौरान बाजार में बिकने वाले रंग व अबीर-गुलाल में कई नुकसानदेह तत्व मौजूद होते हैं। ये तत्व त्वचा की ऊपरी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। इसी कारण रंग छुड़ाने के बाद शरीर में जलन, खुजली होती है। इससे बचने के लिए कोशिश करें कि होली हर्बल रंग व गुलाल से ही खेलें। रंग खेलने से पहले शरीर के हर जगह पर जैतून, नारियल आदि का तेल या लोशन क्रीम लगा लें। ताकि खतरनाक रसायन से बचा जा सके।
पेंट के इस्तेमाल से बचें
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राम प्रकाश के मुताबिक, रंग में अधिक मात्रा में कॉपर सल्फेट आंख व चेहरे पर लग जाए तो व्यक्ति क्षणिक अंधता का शिकार हो जाता है। सिल्वर पेंट में मिला एल्यूमीनियम ब्रोमाइड कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को जन्म दे सकता है। काले रंग में मिला लेड आक्साइड अगर देर तक चेहरे पर लगा रहे तो उससे भूलने की बीमारी होने का डर बना रहता है। जबकि बैगनी रंग में मिला क्रोमियम ऑयोहाइड से अस्थमा हो सकता है। लाल रंग में मिला मरकरी सल्फेट से लकवा की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए बेहतर होगा कि पेंट के इस्तेमाल से बचें।
सबसे सुरक्षित ईको फ्रेंडली होली
केमिकल युक्त रंगों के बीच ईको फ्रेंडली होली सबसे सुरक्षित है। फूलों और उसकी पंखुड़ियों से होली का पर्व मनाया जा सकता है। पलाश के फूलों से तैयार रंग, हल्दी और बेसन के बने रंगों को होली खेलने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एलोवेरा के कांटे निकालकर उसे पीस लें। हरे रंग के पेस्ट का इस्तेमाल करके रंग बनाया जा सकता है। इसमें नीम की पत्तियों के पेस्ट भी इस्तेमाल किया जा सकता है। गुलाब के फूल से लाल, मेंहदी से ऑरेंज, मेरी गोल्ड फ्लोर से पीला, गुलमोहर, धनिया व पालक से हरा रंग बनाया जा सकता है।
छह साल बाद होलिका दहन के एक दिन बाद होली
विक्रमजोज, बस्ती। इस बार होली पर्व का लग्न शनिवार को है। करीब छह साल होलिका जलने के एक दिन बाद होली मनाई जा रही है।
विद्वानों कहना है कि शनिवार को हस्त नक्षत्र व वृद्धि योग में होली 19 मार्च को मनाई जाएगी। ज्योतिष के अनुसार होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में रात के समय भद्रामुक्त काल में मनाया गया। इस वर्ष रात 12 बजे के बाद तक भद्रा की छाया रहने से होलिका दहन के एक दिन बाद 19 मार्च को होली मनाई जाएगी। होलिका दहन के एक दिन बाद होली मनाने का अनूठा संयोग छह वर्षों बाद बना है। इसके पूर्व 2012 में सात मार्च को होलिका दहन व नौ मार्च को होली मनाई गई थी। वहीं 2013 में 26 मार्च को होलिका दहन 28 मार्च को होली मनी थी। वर्ष 2016 में 22 मार्च को होलिका दहन और 24 मार्च को होली मनाई गई थी।
होलिका दहन के बाद शुरू हुआ रंगों पर्व होली
बृहस्पतिवार को होलिका दहन के बाद शुक्रवार को ग्रामीण क्षेत्रों में रंगों की होली खेली गई। वहीं, कुछ जगहों पर होली पर्व को लेकर हुयी सरकारी घोषणाओं व विद्वानों की बातों से असमंजस की स्थिति बनी रही। विक्रमजोत क्षेत्र के छावनी, अमोढ़ा, पैकोलिया, विक्रमजोत, मलौली गोसांई, पटखापुर, बस्थनवां, कोहराएं, रजवापुर, केनौना सहित जगहों पर होली पर नवयुवकों की टोली ने जमकर होली खेली और डीजे के धुनों पर थिरकते हुए लोगों को रंगों से सराबोर कर दिया। गांवों में लोगों ने एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगा कर होली मनाई।