सोनहा। द्वारिका चक चक्कर चौराहे पर सात दिवसीय संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन ध्रुव का प्रसंग सुन श्रद्धालु भावविभोर हो गए। आचार्य पं राजकुमार पांडेय ने कहा कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि से अपमानित होने पर भी ध्रुव की मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया और बड़ा संकट टल गया। इसी तरह परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य और संयम की नितांत आवश्यकता होती है। भक्त ध्रुव की कथा में आचार्य ने कहा कि भक्ति के लिए उम्र की कोई बाधा नहीं है। माता-पिता को बच्चों को बचपन से ही भक्ति की प्रेरणा देनी चाहिए। मुख्य यजमान सूर्यप्रकाश त्रिपाठी, डाॅ. विष्णु प्रकाश त्रिपाठी, रुद्रप्रकाश त्रिपाठी, गुरु प्रसाद पांडेय, प्रभुनाथ आदि मौजूद रहे।
कथा श्रवण से जागृत होता है ज्ञान और वैराग्य
कलवारी। भागवत कथा की सार्थकता इसके उपदेशों को अपने जीवन में उतारने से हैं। यह बात क्षेत्र के मिश्रौलिया गांव में नौ दिवसीय संगीतमय भागवत कथा में वृंदावन से आए कथा वाचक अजय कृष्ण शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि कथा से मन का शुद्धीकरण व संशय दूर होने के साथ मन को शांति मिलती है। कथा के श्रवण मात्र से जन्म-जन्मांतर के विकार दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म, लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं। संवाद