बस्ती। पारा 42 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच चुका है। मौसम के तीखे तेवर से लोग उल्टी दस्त व तेज बुखार से पीड़ित हैं, मगर अपने जिले के स्वास्थ्य महकमा का आंकड़ा अब भी हीट स्ट्रोक के बीमारों की संख्या शून्य बता रहा है। यह अलग बात है कि जिला अस्पताल, ओपेक चिकित्सालय कैली व अन्य सरकारी अस्पतालों में लक्षण वाले मरीजों की संख्या हर दिन 50 का आंकड़ा पार कर जाती है, मगर चिकित्सक इसे हीट स्ट्रोक के बजाय सामान्य मरीजों की तरह ही इलाज व भर्ती कर रहे हैं।
शनिवार को जिला अस्पताल में उल्टी-दस्त व तेज बुखार के करीब 25 मरीज डॉ. अंकित चतुर्वेदी व डॉ. रामजी सोनी के कक्ष में आए थे। उल्टी-दस्त के कारण इन्हें भर्ती करा दिया गया, मगर डॉक्टर इन्हें धूप लगने के बजाय सामान्य रूप से मौसम की मार बताकर इलाज कर रहे हैं। हालांकि इन मरीजों का नाम हीट स्ट्रोक की सूची में नहीं डाला गया है।
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केस एक
शहर के गांधी नगर निवासी रामराज को दो दिन पहले उल्टी-दस्त शुरू हो गई। पहले निजी चिकित्सक को दिखाया, मगर जब कोई आराम नहीं हुआ तो शनिवार को वह जिला अस्पताल पहुंचे। डॉ. अंकित चतुर्वेदी ने उनकी जांच आदि की। बताया कि दो दिन पहले खाना खाने के बाद से उल्टी-दस्त शुरू हुई है। डॉ. चतुर्वेदी ने उन्हें भर्ती करने को कहा, मगर वह नहीं मानें और दवा आदि लेकर चले गए।
केस नंबर 2
ओपेक चिकित्सालय पहुंचे मुंडेरवा निवासी अहमद को उल्टी-दस्त व तेज बुखार था। डॉ. रजत ने उन्हें लक्षण के आधार पर धूप लगने की बात कही, मगर अहमद ने बताया कि उन्होंने बासी भोजन कर लिया था, इसलिए उल्टी दस्त शुरू हो गया है। डॉ. रजत ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कर लिया। शनिवार को उनकी छुट्टी हुई।
बोले चिकित्सक
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अंकित व कैली के चिकित्सालय डॉ. रजत ने कहा कि लक्षण आधारित मरीज आ रहे हैं, मगर उन्हें हीट स्ट्रोक नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि हीट स्ट्रोक में सबसे पहला लक्षण बेहोशी होती है। अब तक करीब 50 से अधिक मरीजों को सप्ताह भर में इलाज किया गया है, मगर बुखार व उल्टी-दस्त तो हो रही है, मगर बेहोश कोई मरीज नहीं हुआ।
हीट स्ट्रोक यानी लू के लक्षण
- धूप के चलते बेहोश हो जाना
- उल्टी दस्त के साथ तेज बुखार होना है। इसके अलावा मरीज को कमजोरी लगने लगती है।
ये है बचाव
- संभव हो तो 12 बजे से 3 बजे के बीच तेज धूप में बाहर न निकलें
- यदि जरूरी हो तो सिर को ढक कर पूरी आस्तीन का वस्त्र पहने
- घर से खूब पानी पीकर निकलें
- बिना भोजन किए घर से न निकलें
- खुले खाद्य पदार्थ व कटे फल कतई न खाएं
- बासी भोजन से परहेज करें।