बहादुरपुर। देश की आजादी में तमाम देश भक्तों ने अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। आजादी के बाद उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तक का दर्जा नहीं मिल सका। देश के इन्हीं रणबांकुरों में गोपाल सिंह का भी नाम शामिल है। बहादुरपुर ब्लॉक के भैंसहटी गांव निवासी गोपाल सिंह के भाई रामकृपाल सिंह के पौत्र इंद्रसेन सिंह ने बताया कि बाबा नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अपना आदर्श मानते हुए अपनी सारी जमा पूंजी 50 हजार रुपये व जीप आजाद हिंद फौज के नाम कर दी। यही नहीं वे आजाद हिंद फौज में शामिल भी हो गए। जब तक देश आजाद नहीं हुआ वे आजाद हिंद फौज के वफादार सिपाही के रूप में काम करते रहे।
उन्होंने बताया कि देश आजाद हुआ तो उन्होंने परिवहन विभाग में बतौर चालक की नौकरी की और अंतिम समय तक चालक के रूप में परिवहन निगम को सेवा देते रहे। आजाद हिंद फौज के गठन के समय सिंगापुर से स्योनान शहर में रहने वाले बहादुरपुर ब्लाॅक क्षेत्र के भैसहटी निवासी गोपाल सिंह को सेनानी का दर्जा न मिलने से उनके भाई के परिवार के अलावा गांव वालों को आज भी मलाल है।
सेनानी का दर्जा मिले इसके लिए जनवरी 1964 में प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी अपने पत्र के माध्यम से गोपाल सिंह पुत्र गुरेन सिंह को सहायता देने को कहा था। बावजूद इसके तत्कालीन शासन व प्रशासन ने सहायता तो दूर सेनानी का दर्जा भी नहीं दिया।