‘शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान हर नारी का अधिकार’
सल्टौआ (बस्ती)। शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान हर नारी का अधिकार है। बेटियों और महिलाओं के प्रति समाज की सोच बदली है, लेकिन अभी और बदलाव की जरूरत है। घर में बेटियों को सम्मान मिलेगा तभी समाज में उनकी स्थिति बदलेगी। इस बदलाव में सामाजिक संगठनों को अहम भूमिका निभानी होगी। लोगों को जागरूक करना होगा।
ये बातें शुक्रवार को संयुक्त विकास आयुक्त विजय श्रीवास्तव ने कहीं। वे अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से अपराजिता मुहिम के तहत नारी सशक्तीकरण विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। मदन मोहन मालवीय शैक्षणिक इंटर कॉलेज देईपार में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि छात्राएं अपनी बात कहने में संकोच न करें। जरूरत पर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करें। बताया कि शासन की ओर से बेटियों के लिए तमाम योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनका लाभ उठाने की जरूरत है। विशिष्ट अतिथि परियोजना निदेशक आरपी सिंह ने कहा कि छात्राओं को सशक्त होने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत होना बहुत आवश्यक है क्योंकि अस्वस्थ और कमजोर मन से किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कन्या सुमंगला योजना, विकास परियोजनाओं के तहत चलाए जा रहे स्वयं सहायता समूह इत्यादि पर भी छात्राओं को विशेष जानकारी दी। वाल्टरगंज थाने के उपनिरीक्षक ऋषिदेव प्रसाद ने छात्राओं को घरेलू हिंसा के बारे में जानकारी दी। कहा कि वे अन्याय न सहें। उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाएं। जरूरत पड़ने पर 1090 पर कॉल कर सूचना दें। उन्होंने बाल विवाह से होने वाले नुकसानों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि ने नारी गरिमा को बनाए रखने की शपथ दिलाई। प्रधानाचार्य अखिलेश द्विवेदी ने आए हुए अतिथियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए अपराजिता अभियान की सराहना की। विद्यालय की 190 छात्राओं ने शपथपत्र भरकर अपराजिता अभियान को समर्थन दिया। इस दौरान एडीओ आईएसबी रामराज, विद्यालय प्रबंधक राम किशोर त्रिपाठी अध्यापक शत्रुधन प्रसाद, विनोद, राकेश यादव, संदीप, बिंदु प्रसाद, विजय प्रकाश, संजय कुमार आदि उपस्थित रहे। संचालन आज्ञाराम ने किया।
आगे बढ़ रही हैं बेटियां : हिमांशी
विद्यालय की छात्रा हिमांशी उपाध्याय ने कहा कि आज बेटियां सशक्त बन रही हैं और प्रत्येक क्षेत्र में कामयाबी हासिल कर रही हैं। बस जरूरत है कि उनके हौसलों को और बढ़ाया जाए। यह काम घर से शुरू होना चाहिए।
अधिकारों की जानकारी मिली : श्रेया
छात्रा श्रेया शुक्ला ने कहा कि कार्यक्रम में बेटियों को अधिकारों की जानकारी दी गई। अपराजिता कार्यक्रम से बेटियों के प्रति समाज की सोच में बदलाव आ रहा है। ऐसे कार्यक्रमों को स्कूलों में आयोजित किए जाने चाहिए।
बढे़गा हौसला, डर खत्म होगा : स्वेच्छा
स्वेच्छा त्रिपाठी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से बेटियों का हौसला बढ़ेगा। वे अपने फैसले खुद लेंगी और आगे बढ़ेंगी। अमर उजाला की ओर से की जा रही हौसला आफजाई से महिलाओं और छात्रों के भीतर से डर खत्म होगा।
समाज की सोच में बदलाव जरूरी : मानसी
मानसी पांडेय ने कहा कि नारी सशक्तीकरण के लिए समाज की सोच में बदलाव जरूरी है। बेटियां किसी से कम नहीं हैं। वे अपना लक्ष्य हासिल कर सकती हैं। इसके लिए अपराजिता जैसे कार्यक्रमों से उनका उत्साह बढ़ता है।