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Basti News: पूरी जिम्मेदारी निभा रही आधी आबादी, हर क्षेत्र में लहराया परचम

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बस्ती। गांव की पगडंडियों से विकास की राह तक महिलाओं के कदम अब मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। मनरेगा के तहत जिले के प्रत्येक ब्लॉक में बड़ी संख्या में महिलाएं श्रमदान कर न सिर्फ परिवार की आर्थिक नींव सशक्त कर रही हैं, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी कायम कर रही हैं।
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महिला सशक्तीकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी भूमिका निभा रही हैं। ये महिलाएं काम के साथ ही परिवार को भी आर्थिक रूप से मजबूती दे रही हैं। गांव के लोगों को गांव में ही काम मिल सके, इसको लेकर मनरेगा योजना चलाई जा रही है। इसमें पुरुषों के साथ ही महिलाओं को भी बराबर से कार्य दिया जा रहा है।
काम पाकर महिलाएं निहाल हैं तो पुरुषों के साथ कदमताल कर रही हैं। मनरेगा योजना में काम करने वाले जिले में कुल 3,81,924 लोगों का पंजीकरण है। इसमें करीब 95,158 महिलाएं भी इस योजना के तहत पंजीकृत होकर काम कर रही हैं। इन महिलाओं के लिए विभाग ने 37 लाख 46 हजार मानव दिवस सृजित है। डीसी मनरेगा संजय शर्मा का कहना है कि रोजगार संबंधी कार्यों में महिलाएं आगे आ रही हैं।
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महिलाओं के आर्थिक विकास का जरिया बना आजीविका मिशन : बस्ती। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। उनके विकास में आजीविका मिशन जरिया बन रहा है। आधुनिकता के दौर में जहां एक तरफ रोजगार के अवसरों में गिरावट दर्ज देखने को मिल रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं के लिए लाभदायक सिद्ध हो रहा है। जिले में 16500 स्वयं सहायता समूह से दो लाख महिलाएं जुड़ी हैं। रेशम कीट पालन, मछली पालन, जनरल स्टोर, ब्यूटीपार्लर, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मशरूम उत्पादन से लेकर अन्य कार्य में लगी हैं। इन महिलाओं ने स्वरोजगार को अपना कर बीते कुछ वर्षों से कृषि बागवानी को तरजीह देते हुए जैविक खाद और सब्जी पौध से लेकर अन्य कार्यों में सफल हो रही हैं।
समूह सखी 1214, आजीविका सखी 942, विद्युत सखी 260, स्वास्थ्य सखी 714, बैंक सखी 761, सूक्ष्म सखी 185, कृषि सखी 142, ड्रोन सखी छह हैं। इसके अलावा अन्य कार्यों में महिला मेट 1210, शौचालय की केयर टेकर 1172, समूह की महिला कोटेदार 60 हैं। डीसी एनआरएल आशा देवी का कहना है कि महिलाएं लगातार काम करके खुद को साबित कर रही हैं। आईसीडीएस विभाग में तीन हजार के करीब आंगनबाड़ी और सहायिका सेवा दे रही हैं। इसी प्रकार 2300 के करीब आशा बहू सेवा में हैं।
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