जेई/ईएएस से लड़ने के लिए प्रदेश से लेकर केंद्र सरकार नित निए निर्देश जारी कर रही है लेकिन धरातल पर हालत कुछ और ही है। आधे शहर में ही अभी तक पेयजल की सुविधा है। जबकि एक हजार हैंडपंप में अधिकतर खराब हैं। कई पर तो लाल निशान लगाकर उखाड़ने के निर्देश भी थे। इसके बावजूद नहीं उखाड़े गए। सवा लाख की आबादी वाले इस शहर में महज छह ओवरहेड टैंक हैं। नगरपालिका की ओर से करीब एक हजार इंडिया मार्क-टू हैंड पंप लगवाए गए हैं। इससे शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। विभागीय दावों और जमीनी हकीकत में विरोधाभास है। शहर में लगे हैंडपंपों की सच्चाई यह है कि कई बेपानी हो चुके हैं। कुछ मरम्मत के अभाव में खराब हैं तो कुछ के रीबोर की जरूरत बताई जा रही है। गर्मी शुरू हो चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में फिर पेयजल की समस्या का सामना करना पडेे़गा। बावजूद इसके नगर पालिका की ओर से इस दिशा में अभी प्रभावी पहल शुरू नहीं की गई है।
शहर एक नजर में
आबादी एक लाख 20 हजार
रजिस्टर्ड घर 18 हजार
पेयजल कनेक्शन 10 हजार
ओवर हेड टैंक 06
इंडियामार्क हैंडपंप एक हजार
सार्वजनिक स्थलों के हैंडपंप भी बेपानी
शहर के 10 प्रमुख स्थानों पर लगे इंडिया मार्क-टू हैंडपंप बेपानी हो चुके हैं। इन्हें रीबोर किया जाना है लेकिन अभी तक कवायद ठप है। अवर अभियंता जलकल योगेंद्रनाथ त्रिपाठी के मुुताबिक रेलवे स्टेशन, हनुमान मंदिर, जिला अस्पताल, एसपी ऑफिस, तुर्कहिया धोबी टोला, महरीखावां कालीमंदिर, मिश्रौलिया शिवमंदिर, रौता अमरूदबाग, कटरा पानी टंकी, पुराना डाकखाना आदि क्षेत्रों के हैंडपंपों को रीबोर कराया जाना है।
पांच प्रमुख स्थानों पर लगा लाल निशान
पांच स्थानों पर प्रदूषित पानी उगलने वाले हैंडपंप चिह्नित कर उन पर लाल निशान जलकल विभाग की ओर से लगा दिया गया है। जिन्हें उखाड़ने के भी निर्देश थे लेकिन कवायद ही शुरू नहीं हो सकी। आज भी इन नलों का ही पानी पीने के लिए लोग मजबूर हैं। विभाग के पास इनके स्थान पर नए इंडिया मार्क-टू हैंडपंप लगवाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
गुम हो गए वाटरपोस्ट
करीब एक दशक पहले तत्कालीन पालिका अध्यक्ष स्नेहलता पाल के कार्यकाल में शहर में प्रमुख स्थानों पर वाटर कूलर लगाए गए थे, जिसमें कुछ जर्जर हालत में खड़े हैं। जो उसके होने का अहसास दिलाते हैं। इसके बाद के नपा अध्यक्षों ने न तो इसको मरम्मत कराए जाने के बारे सोचा और न ही नए वाटर कूलर लगवाए जाने की योजना बनाई।
18 हजार घर, 10 हजार में पानी कनेक्शन
नगर पालिका में 18 हजार मकान रजिस्टर्ड हैं। जबकि पालिका क्षेत्र की आबादी एक लाख 20 हजार है। लगभग 10 हजार घरों तक ही पेयजल आपूर्ति का कनेक्शन है। शेष घर में लोग निजी हैंडपंप से काम चलाते हैं। वाटर लेवल नीचे जाते ही कम गहराई वाले हैंडपंप जवाब दे देते हैं। जिसके बाद शुरू हो जाती है पानी के लिए मारामारी।
प्रदूषित जल से बढ़ी बीमारी: डॉ. सोनी
शहर में वैसे तो प्रदूषित जल क्षेत्र चिह्नित नहीं हैं लेकिन जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचने वाले अधिकतर मरीज जलजनित बीमारियों वाले होते हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टर रामजी सोनी कहते हैं कि टाइफाइड, उल्टी-दस्त, इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियां दूषित जल का परिणाम हैं। डॉ. सोनी का कहना है कि ओपीडी में आने वाले 50 फीसदी मरीज इन्हीं बीमारियों से पीड़ित होते हैं। किन क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक है यह बता पाना मुश्किल है।
अमृत योजना से पहुंचाएंगे पेयजल: रूपम
नगर पालिका अध्यक्ष रूपम मिश्रा ने कहा की सरकार की ओर से अमृत योजना लागू की गई है, जिसमें पालिका क्षेत्र के सभी घरों में मीटर लगाकर वाटर सप्लाई कनेक्शन दिया जाएगा। ताकि लोगों को पेयजल मिल सके। शीतल जल के लिए शासन को सार्वजनिक स्थानों पर वाटर कूलर लगवाने के बोर्ड में प्रस्ताव पारित कराके भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद शहर वाटर कूलर लगवाया जाएगा।
जिम्मेदारों की सुनिए
अवर अभियंता जलकल योगेंद्र नाथ तिवारी का कहना है कि रीबोर और मरम्मत लायक हैंडपंपों को चिह्नित कराया जा रहा है। अभी तक 10 हैंडपंप रीबोर के लिए चिह्नित किए गए हैं। जहां हैंडपंपों के खराब होने की सूचना मिलती है, उसकी मरम्मत कराई जाती है और जो रीबोर योग्य हैं उसकी सूची जल निगम को भेजी जाती है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता वी प्रसाद का कहना है कि विगत एक वर्ष से बजट न मिलने के कारण कोई नए इंडिया मार्क हैंडपंप नहीं लगाए जा सके। शासन को बताया जा चुका है। जैसे बजट मिलता है, जो पालिका प्रशासन की ओर से मांग है, उसको पूरा किया जाएगा।