कैग की रिपोर्ट ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर पहले भी सवाल उठाए हैं।
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उप कृषि निदेशक कार्यालय में वरिष्ठ लिपिक के पद पर तैनात घनश्याम उपाध्याय को पंपसेट अनुदान के घोटाले के मामले में आरोप पत्र दिया गया है। मामला चार साल पुराना है। जिला मशीनरी एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष सूर्य प्रकाश शुक्ल की शिकायत पर तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के बालाजी ने जांच किया था। डीएम को दी गई रिपोर्ट में अनुदान घोटाले के लिए तत्कालीन डीडी और घनश्याम उपाध्याय को दोषी मानते हुए कार्रवाई करने की संस्तुति की गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन डीएम अनिल कुमार दमेले ने प्रमुख सचिव कृषि को डीडी और वरिष्ठ लिपिक के विरुद्घ कार्रवाई करने के लिए डीओ लिखा था, कार्रवाई तो नहीं हुई अलबत्ता नए सिरे से जांच कराने का आदेश जरूर हो गया। मामला चार साल तक जांच के चक्कर में पड़ा रहा। अब जाकर इस मामले में आरोपी को आरोप पत्र दिया गया।
दो बिंदुओ पर दिए गए आरोप पत्र में वरिष्ठ लिपिक और एक पंपसेट डीलर के बीच अनुदान के बदले कमीशन लेने की बात सीडी में स्वीकार करने की बात कही गई है। सीडी में डीलर से प्रति पत्रावली डेढ़ हजार रुपये की मांग की जा रही है। साथ ही पांच पत्रावली को मुफ्त करने का वादा भी करते पाया गया। पूरे सीडी में सिर्फ लेनदेन की ही बात कही गई है। इसमें वरिष्ठ लिपिक की संलिप्ता पाई गई। दूसरे बिंदु में विकास खंड गौर के एक पंपसेट विक्रेता की ओर से एक ही क्रम पंप अनुदान के लिए 30 पत्रावली पाई गई। फिर अगले वित्त वर्ष यानि 2013 एवं 2014 में भी लगातार तीन दिन तक एक ही ब्लॉक के 31 पत्रावली पाई गई। किसानों को पावती देना भी नहीं पाया गया। आरोप पत्र में कहा गया है कि पंपसेट डीलरों से मिलकर भ्रष्टाचार को बढ़ाने का आरोपी पाया गया। शिकायतकर्त्त ने बताया कि दोषी पाए जाने के बाद भी डीडी और लिपिक के विरुद्घ चार साल में कार्रवाई न होना यह साबित करता है कि विभाग में भष्टाचारियों का ही बोलबाला है।