परिषदीय स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने के लिए तैनात किए गए संकुल प्रभारियों की तैनाती में मानकों की अनदेखी की गई। सीनियर शिक्षकों के रहते जूनियर शिक्षकों को संकुल प्रभारी बना देने का मामला सामने आया है। जिले में कुल 139 शिक्षक संकुल प्रभारी बनाए गए है, इनमें अधिकतर की तैनाती नियम विरुद्घ की गई। लगभग 70 फीसदी संकुल प्रभारी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाए स्कूलों के निरीक्षण सहित अन्य गैर जरूरी कार्य कर रहे हैं। नियम विरुद्घ प्राइमरी स्कूल के हेड मास्टर तक को संकुल प्रभारी बना दिया गया। जबकि इसके लिए पात्रता जूनियर स्कूल के सबसे अधिक अनुभव वाले शिक्षक की है।
आज से दस साल पहले शासन ने गुणवत्ता संवर्धन एवं शिक्षा में सुधार के लिए प्रत्येक न्याय पंचायत में एक एक संकुल प्रभारी को तैनात करने का निर्णय लिया। एक न्याय पंचायत में 15 से 25 परिषदीय स्कूल आते हैं। इसके लिए जूनियर स्कूल के सबसे अधिक अनुभव वाले शिक्षक को संकुल प्रभारी बनाने का निर्णय हुआ। पहले इस पद के लिए शिक्षकों को लिखित परीक्षा देनी पड़ती थी, इसके पीछे सरकार की मंशा योग्य शिक्षकों को संकुल प्रभारी बनाने की थी, ताकि वह अपनी योग्यता का उपयोग शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए कर सके। बाद में इस पद को पदेन घोषित कर दिया गया। इसी का लाभ विभाग और जूनियर शिक्षकों ने उठाना शुरू कर दिया।
बीएसए मनिरात सिंह ने बताया कि संकुल प्रभारी बनाने के पीछे विभाग और सरकार की मंशा स्पष्ट थी। बताया कि संकुल प्रभारी का सबसे बड़ा दायित्व उन स्कूलों में जाकर पढ़ाना होता है जिस विषय के या तो शिक्षक नहीं है या फिर है तो वह पढ़ा नहीं पा रहे हैं। एक शिक्षक नेता ने कहा कि विभाग ने जिन जूनियर शिक्षक को संकुल प्रभारी बनाया है, उनमें अधिकतर या तो घूमते रहते हैं, या फिर निचले स्तर के सूत्र का काम कर रहे हैं।
बताया कि विभाग ने ऐसे शिक्षक को भी संकुल प्रभारी बना दिया जो प्राइमरी स्कूल के हेड मास्टर है, जबकि नियमानुसार किसी भी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक को संकुल प्रभारी नहीं बनाया जा सकता है। कुछ ने तो जबरिया उन संकुल प्रभारियों से यह लिखवा लिया है कि वह इसके योग्य नहीं है, या फिर बीमारी लिखवा लिया है। विभाग के अधिकारी भी सब कुछ जानते हुए आंख बंद किए हुए हैं।