पुलिस मुठभेड़ में ढेर इनामी बदमाश फिरोज।
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पुलिस मुठभेड़ में मारा गया फिरोज पठान के गिरफ्तार गुर्गों ने पुलिस के सामने कई राज उगले हैं। उनके अनुसार पठान दस वर्षों से जरायम की दुनिया में सक्रिय था। लूट की घटना को अंजाम देने के बाद वह भांजे इरशाद की मदद से मुंबई भागकर कुछ दिन वहीं ठिकाना बनाना था। लूट के धन कहां और कैसे खर्च होने यह भांजा ही तय करता था।
उसकी पहली पत्नी रेहाना निवासी पूरखास थाना सराय अकील जिला कौशांबी से करीब 20 वर्ष पूर्व तलाक हो चुका है। इसके बाद उसने मुंबई में शादी डॉट काम के माध्यम से ज्योति रामजग दूबे उर्फ हिना पठान निवासी थाणे मुंबई से प्रेम विवाह किया। दूसरी पत्नी के साथवह रीगल अपार्टमेंट मीरा रोड भयंदर थाणे मुंबई में रहता था। दिसंबर-2019 में उसने इस आवास को छोड़कर दूसरे पते किंजल सोसायटी बिल्डिंग मुंबई में रहने लगा।
एसपी हेमराज मीणा ने बताया कि फिरोज की पहचान एक विलासिता पूर्ण जीवन जीने वाले व्यक्ति के रूप में मुंबई में रही है। मुंबई में ही इस जिले की घटना में संलिप्त अजय यादव निवासी बतौरिया थाना खेसरहा सिद्धार्थनगर से परिचय हुआ। यह इसी परिचय के आधार पर सितंबर-2019 में सिद्धार्थनगर आया और किराए का कमरा लेकर वहीं से एचडीएफसी बैंक फरेंदा (महराजगंज) एवं आईसीआईसीआई बैंक बस्ती में घटना को अंजाम दिया।
एसपी ने बताया कि दोनों बदमाशों ने थाना चरवा कौशांबी में एक ग्राहक सेवा केंद्र से लूट की घटना, एक व्यापारी से बाइक की लूट एवं थाना सराय अकील में ग्राहक सेवा केंद्र में लूट की है। सहअभियुक्त विजय कश्यप ने पूछताछ में बताया कि वर्ष-2011 में वह फिरोज पठान के साथ मुंबई से फिरोज के रवि सिंह नामक दोस्त के बुलाने पर सूरत (गुजरात) में एक सोना व्यापारी से लूट करने गया था।
घटना से पूर्व ही दोनों पकड़े गए थे। फिरोज का भतीजा वसीम अहमद एवं साला गुड्डू भी पकड़ा गया है, जो वर्तमान में जिला कारागार प्रयागराज में निरुद्ध हैं। वह हर घटना में नए साथियों को साथ में रखता था। लूट का अधिकतम हिस्सा वह अपने पास रखता था। एसपी ने बताया कि तीन माह में 30 से अधिक मोबाइल नंबरों का उसने इस्तेमाल किया।