कुदरहा। दम्भ और घृणा से भरा शख्स खुद को बलवान समझ कर सबका अपमान करता है। ऐसा करने से वह विनाश के मार्ग पर बढ़ने लगता है। जब सब कुछ बर्बाद हो जाता है तब उसे गलती का भान होता है। इसीलिए भगवान की कृपा पाने के लिए प्रत्येक प्राणी के प्रति करुणा, दया, अनुराग और सम्मान का भाव होना चाहिए।
यह बातें प्रतापगढ़ से आए कथाव्यास डॉ. विनोद शुक्ल व कमलेश पति मिश्र ने कही। उन्होंने विशुनपुरा में शनिवार को श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि खुद से छोटा समझकर प्रजापति दक्ष ने अहंकार वश भगवान भोलेनाथ को न्योता नहीं भेजा। पिता के अनुराग में माता सती ने भगवान शिव से मायके जाने का आग्रह किया तो उन्होंने मना कर दिया। फिर भी माता सती का मन पिता के घर जाने के लिए व्याकुल होने लगा। यह देख शिवजी ने जाने का अनुमति तो दी, लेकिन यह भी कहा कि बगैर बुलाए जाने पर तुम्हें दुख ही मिलेगा। संवाद