बस्ती। बेसिक शिक्षा विभाग की हालत मत पूछिए। यहां बच्चों के खेल किट में भी बड़ा खेल है। हर साल सवा करोड़ से अधिक का बजट केवल खेल सामग्रियों की खरीदारी पर खर्च हो रहा है। लेकिन, कुछ गिनती के स्कूलों को छोड़ दें तो अधिकांश जगहों पर बच्चों को खेलने के लिए एक गेंद भी नसीब नहीं हो रही है। लंच या खेलकूद की घंटी में कुछ नन्हें-मुन्ने माटी से खेल कर मन भर रहे हैं तो कुछ कागज की जहाज बनाकर उड़ा रहे हैं।
जानकार बताते हैं कि प्रत्येक वर्ष स्कूलों में खेल सामग्री के नाम पर बड़ा गोलमाल हो रहा है। सब कुछ जानते हुए जिम्मेदार भी मौन रहते हैं। जिले में परिषदीय स्कूलों की संख्या 2071 है। इसमें कंपोजिट और जूनियर मिलाकर 639 विद्यालय हैं। इसके अलावा 1432 प्राइमरी स्तर के विद्यालय हैं। इन सभी विद्यालयों में ऑनलाइन छात्र संख्या एक लाख 66 हजार 873 है। परिषदीय बच्चों को विद्यालय परिसर में पढ़ाई के साथ खेलने- कूदने के लिए शासन से हर साल खेल सामग्री खरीदने के लिए अच्छा खासा बजट आवंटित होता है।
प्राइमरी स्कूल के लिए पांच हजार और प्रति जूनियर व कंपोजिट विद्यालय दस हजार रुपये आवंटित किया जाता है। इस साल भी एक करोड़ 35 लाख 50 हजार रुपये का बजट इस मद में आवंटित हुआ है। इसके पहले पूर्व के सत्रों में विद्यालयों की संख्या अधिक होने के कारण खेल सामग्री के मद में डेढ़ करोड़ रुपये की खपत हो रही थी। जानकारों की मानें तो इस बजट में हर वर्ष गोलमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है।
जेम पोर्टल पर रजिस्टर्ड सेटिंग के फर्मों से बिल बाउचर बनवाकर जिम्मेदार भुगतान कर देते हैं। बाद में कुछ अंश छोड़कर बाकी रकम वापस ले लेते हैं। निरीक्षण के दौरान दिखाने के लिए कुछ सामग्री रखी रहती है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जिन स्कूलों में गेम टीचर के रूप में अनुदेशक तैनात है वहां कुछ खेल सामग्री उपलब्ध है। लेकिन, जहां अनुदेशक की तैनाती नहीं है वहां इसकी उपलब्धता न के बराबर है।
परिषदीय बच्चे लंच और खेलकूद की घंटी में खो-खो, दौड़, माटी और कागज से खेल कर अपना मन भर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि यदि हर वर्ष थोड़ा-थोड़ा खेल सामग्री मंगाया गया होता तो ज्यादा नहीं केवल पांच सालों में इन विद्यालयों में अच्छा स्टॉक उपलब्ध रहता।
दिया तले अंधेरा, माटी में खेलते मिले बच्चे
बीएसए भवन के ठीक बगल कंपोजिट विद्यालय नगर क्षेत्र संचालित है। मगर यहां दिया तले ही अंधेरा है। सोमवार को इस विद्यालय में पहुंचने पर कुछ बच्चे बरामदे के फर्श पर बैठकर मध्याह्न भोजन खाते हुए मिले। कुछ बच्चे परिसर में कागज की जहाज बनाकर उड़ा रहे थे। छोटे बच्चे मिट्टी और मोरंग में खेलते हुए देखे गए। विद्यालय में सिर्फ एक शिक्षक जावेद अंसारी मिले। कुछ देर के बाद प्रधानाचार्य संतोष श्रीवास्तव भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि खेल सामग्री की खरीदारी हुई है। बच्चे जब खेलने की इच्छा जाहिर करते हैं तो दिया जाता है।
आधा खेल किट आ गया है, आधा बाकी
प्राथमिक विद्यालय नगर बाजार की पड़ताल की गई तो प्रधानाध्यापक रीता यादव ने बताया कि उनके यहां खेल किट मंगा लिया गया है। लेकिन, बहुत कम सामग्री ही मौके पर दिखाई गई। यहां 119 बच्चे पंजीकृत है। जबकि जूनियर विद्यालय के प्रधानाध्यापक डॉ. प्रमोद सिंह ने भी दावा किए कि पंजीकृत 124 बच्चों के लिए आधा खेल सामग्री मंगा ली गई है। आधा आना अभी बाकी है।