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Basti News: रेस्टोरेंट से रैकेट तक ग्राम प्रधान के धंंधे ने खोली पुलिस की आंखें

Thu, 06 Nov 2025 12:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। ग्राम प्रधान के जिस्मफरोशी के अड्डे ने पुलिस की आखें खोल दी। नागरिकों की शिकायतों को नजरअंदाज करते रहने वाले अधिकारी हैरत में हैं। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा है कि जिले में देह व्यापार का नेटवर्क इतनी गहराई तक अपनी जड़ें जमा चुका है।
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सोमवार को पकड़े गए अड्डे की छानबीन में पता चल रहा है कि शहर से निकलकर अब यह धंधा कस्बों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया है। हाईवे किनारे बने रेस्टोरेंट, मसाज पार्लर और कई गेस्ट हाउस इस धंधे के नए अड्डे बन गए हैं। हर्रैया में रेस्टोरेंट की आड़ में चल रहे जिस अड्डे का पर्दाफाश हुआ, उसने पुलिस के साथ-साथ पूरे प्रशासनिक तंत्र की नींद उड़ा दी है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह कि यह अड्डा किसी सामान्य व्यक्ति का नहीं, बल्कि ग्राम प्रधान के संरक्षण में चल रहा था। पुलिस जांच में ऐसे कई नाम सामने आ रहे हैं, जिनकी गिनती समाज के सम्मानित चेहरों में होती है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बस्ती में जिस्मफरोशी का यह नेटवर्क अब सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है। हाईवे से जुड़ाव और बाहरी लोगों की आवाजाही ज्यादा होने के कारण गिरोहों को काम करने में सहूलियत मिल रही है।
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पुलिस की एक गोपनीय रिपोर्ट बताती है कि बीते छह महीनों में ही दर्जनों बार संदिग्ध होटल बुकिंग और मसाज सेंटरों की शिकायतें दर्ज हुईं, मगर कार्रवाई सीमित रही। स्थानीय स्तर पर कई पुलिसकर्मी और प्रभावशाली लोग इन अड्डों से ‘कट’ या ‘कवर’ पाते हैं, यह आरोप अब खुलकर लगने लगे हैं।
गरीबी और लालच में धकेली जा रहीं महिलाएं : धंधे में शामिल एजेंट गांवों में बेरोजगार या आर्थिक संकट झेल रहीं महिलाओं और लड़कियों को आसान कमाई का लालच देकर फंसा रहे हैं। एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, कई युवतियों को यह कहकर बुलाया जाता है कि उन्हें होटल या पार्लर में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी मिलेगी। बाद में दबाव और धमकी देकर उन्हें धंधे में उतार दिया जाता है। जो इंकार करती हैं, उनके परिवार तक धमकी पहुंचाई जाती है। सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क का फैलाव अब सरहद पार तक है। नेपाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से ‘ऑन-डिमांड’ लड़कियों को बुलाया जा रहा है। ऑनलाइन बुकिंग और व्हाट्सएप लोकेशन शेयरिंग के जरिये ग्राहक तक डिलीवरी की जाती है।
पुराना दाग, नया रूप : शहर के एक वरिष्ठ नागरिक याद करते हैं, करीब पंद्रह साल पहले रेलवे स्टेशन के पास का एक मोहल्ला देह व्यापार के लिए बदनाम था। पुलिस ने सख्ती की तो वो अड्डे बंद हो गए, लेकिन अब वही धंधा आधुनिक रूप में लौट आया है। फर्क बस इतना है कि पहले सब कुछ खुलेआम होता था, अब पर्दे के पीछे एप्स और होटल की दीवारों के भीतर हो रहा है। यानी प्रशासन ने शहर का दामन तो साफ कर दिया, लेकिन गंदगी ने अब नए ठिकाने बना लिए हैं।
सफेदपोशों की ढाल, समाज की चुप्पी : सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिन चेहरों को समाज में आदर्श माना जाता है, वही अब इस धंधे के परदे के पीछे खड़े दिख रहे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि जब भी कोई बड़ा रैकेट पकड़ा जाता है, कुछ घंटों में ही ऊपर से फोन कॉल आने लगते हैं। कई बार कार्रवाई आधी अधूरी रह जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस को सब पता है, लेकिन राजनीतिक दबाव और आर्थिक हितों के चलते कोई आगे नहीं बढ़ता।
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