एक किशोरी को नाजुक हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया
दुबौलिया क्षेत्र के अशोकपुर सतहा पुरवा में हुआ हादसा
संवाद न्यूज एजेंसी
दुबौलिया (बस्ती)। अशोकपुर सतहा पुरवा गांव के दक्षिण सरयू नदी में बुधवार को मवेशियों को नहलाते समय चार किशोर-किशोरियां पानी में डूब गईं। उनमें एक किशोर व किशोरी को आसपास के लोगों ने बचा लिया, मगर 13 वर्ष की दो किशोरियों की मौत हो गई। सुरक्षित निकाली गई एक किशोरी के पेट में पानी भर गया। इससे उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
जानकारी के अनुसार, बुधवार की दोपहर अशोकपुर सतहा पुरवा गांव निवासी चंद्र प्रकाश की पुत्री रूसी (13) गांव की सुनीता (14) पुत्री पृथ्वी पाल निषाद, अनामिका (14) पुत्री लालता प्रसाद और गंगा (13) पुत्र शंकर दयाल सहित गांव के अन्य लोग मवेशियों को नहलाने के लिए सरयू नदी में ले गए थे। मवेशियों के नहलाने के बाद निकालते समय रूसी, सुनीता, अनामिका व गंगा नदी की धारा में बहने लगे। मौके पर मौजूद लोगों ने गंगा और अनामिका को सुरक्षित निकाल लिया। कुछ समय बाद खोजबीन कर रूसी और सुनीता को भी गहरे पानी से निकाला गया। रूसी और सुनीता की मौत हो चुकी थी। गंगा की हालत सामान्य है। अनामिका की हालत गंभीर देख परिजन जिला अस्पताल ले गए। हादसे की सूचना पर पहुंचे थानाध्यक्ष चंद्रकांत पांडेय ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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15 दिन पहले भी नहाते समय डूब थे चार बच्चे
12 मई की दाेपहर में पिपरी गांव व रमवापुर के करीब नौ बच्चे स्नान कर रहे थे। इतने में चार बच्चे नदी की धारा में लापता हो गए थे। बच्चों के शोर मचाने पर आसपास के लोगों ने पहुंचकर नदी से पांच बच्चें को बचा लिया। पिपरी गांव निवासी बंशीधर गिरि की बेटी पार्वती (20) व शालिनी (17), बंशीधर के भाई अनिरुद्ध की पुत्री काजल (14) और रमवापुर निवासी सोहन पुत्र रामू (13) नदी की धारा में लापता हो गए। स्थानीय गोताखोरों ने कुछ घंटे बाद पार्वती व काजल का शव ढूंढ निकाला था। सोहन व शालिनी का पता नहीं चला। बाद में सोहन का शव उतराया हुआ मिला था, मगर शालिनी का अब तक पता नहीं चला।
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बालिका की मौत पर परिजनों का रो रो कर बुरा हाल
सरयू नदी में गांव के बच्चों की डूबने की खबर सुनकर सभी के परिजन बदहवास नदी के तरफ भागे। रूसी के पिता चंद्र प्रकाश व माता रिंका ने बेटी का शव देखकर आपा खो बैठी। रूसी तीन बहन व एक भाई में तीसरे नंबर की थी। पिता मेहनत-मजदूरी करते हैं। सुनीता के पिता पृथ्वी पाल एवं माता श्रीमती बेटी सुनीता की मौत की खबर सुन दहाड़े मार कर रोने लगीं। सुनीता तीन बहन एवं पांच भाई चौथे नंबर की थी। पिता घर पर ही रहकर मेहनत मजदूरी कर परिवार पालते हैं। बालिकाओं की मौत की खबर सुन ग्रामीणों की मौके पर भीड़ जुटी रही।
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कौशल्या की दिलेरी की चौतरफा चर्चा
सरयू नदी में डूबे रहे बच्चों को मवेशी नहला रही गांव की कौशल्या पत्नी मोती लाल ने दो बच्चों को बचाया। कौशल्या ने बताया की मवेशी चराने के बाद गांव के लोग जानवरों को पानी पिलाने और नहलाने गांव के दक्षिण सरयू नदी में ले गये थे। मवेशियों के साथ बच्चे बाहर निकालने के लिए घुस गए थे। अचानक गांव की रूसी, सुनीता, अनामिका, गंगा नदी के तेज बहाव के संपर्क में आने से डूबने लगे।डूबता देख बच्चों को बचाने के लिए नदी में कूद पड़ी। किसी तरह से अनामिका और गंगा को अपनी साड़ी खोलकर पकड़ा दिया। साड़ी के सहारे दोनों को खींच कर सुरक्षित बाहर निकाला। दोबारा अन्य लोगों के साथ रूसी और सुनीता को गोता लगा कर बाहर खींचा लेकिन तब तक दोनों की सांसें थम गई थीं।