फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में चारा संकट गहराया

Thu, 04 Aug 2016 10:50 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
विज्ञापन
विक्रमजोत क्षेत्र मे नाव से पशुओ के लिए चारा लाने जाते ग्रामीण।
विज्ञापन
घाघरा का जलस्तर भले ही कम हुआ लेकिन कटान पर कोई फर्क नहीं है। बृहस्पतिवार को नदी खतरे के निशान 92.73 से 29 सेमी. ऊपर 93:02 पर बह रही थी। उधर बाढ़ खंड की ओर से किए जा रहे सुरक्षा के इंतजाम को स्थानीय लोग नाकाफी बताते हुए नाराजगी जता रहे हैं।
विज्ञापन

 
विक्रमजोत क्षेत्र के दर्जनभर गांव घाघरा की बाढ़ की चपेट में हैं। 2014 में  बने नवनिर्मित लोलपुर-विक्रमजोत बांध से बिल्कुल सटकर बह रही घाघरा बांध के दोनों छोर पर कहर ढा रही है। यहां कटान जोरों पर  है। रुक रुक कर हो रही कटान से गांव वालों के साथ ही बाढ़ कार्य खंड के अधिकारियों की भी नींद हराम है। आए दिन उच्च अधिकारी कटान स्थल का  दौरा कर रहे हैं। मगर बचाव और राहत कार्यों से ग्रामीणों में असंतोष है। कल्याणपुर, भरथापुर, सहजौरा पाठक, पड़ाव सहित केशवपुर, रामनगर, भदोई, मुंडेरीपुर, रानीपुर, कठवनिया में दो तिहाई फसल डूब गई है। कई बगीचे जिसमें आम, नीम, महुआ के बड़े बड़े पेड़ थे गांव वाले काट कर ले जा रहे हैं। लकड़ी के ठेकेदारों की इस आफत में चांदी है। 

ठोकर नंबर एक व दो में कटान जोरों पर है।  बगल के खजूर, आम के बगीचे कि मिट्टी तेजी से बाउल बना रही धारा में समा जा रही है। मोरंग ईंटें से भरे बोरे तिनकों कि तरह बह जा रहे हैं। अवर अभियंता दया शंकर सिंह ने बताया कि जैसे जैसे नदी घटेगी कटान और तेज  होगी। ठोकर नंबर एक और दो सबसे ज्यादा संवेदनशील स्पाट बने हैं। नदी अयोध्या से सीधे इसी जगह आकर टकरा रही है और यही से धारा टर्न करती है जो खतरे की घंटी है। इस प्वाइंट पर काम तेज कर दिए गए हैं। भरथापुर मे जग्गा सिंह, हरि सिह व अवधू सिंह का घर नदी के किनारे आ गया है।  सोमवार को हुई भीषण कटान से पूरा गांव हिल गया। देखते देखते नदी ने पांच बीघा जमीन छीन ली। जिसमें दो आम के पेड़ जानवरों के रहने का छप्पर भी बह गया। 
विज्ञापन

खतमसराय के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि हनुमान सिंह ने बताया कि मुंडेरीपुर,  भदोई के सिवान में कई दिनों से बाढ़ का पानी भरा हुआ हैं। सिंचाई विभाग की असेे ये निर्मित तालाब कि सीढ़िया व रैंप सब ढह गया है। लाखों का  नुकसान हुआ है। कई जगह पर घरों से निकलना मुश्किल है। सबसे ज्यादा संकट पशुओं के चारे का है। स्वास्थ्य विभाग की टीम दौरा कर रही है। लेकिन संक्रमण से फैल रही बीमारी पर काबू नहीं कर पा रहे हैं। अभी तक इन गांवों में पशुओं को टीका भी नहीं लगा है। गौरियानयन के बीडीसी सदस्य जनार्दन पाल ने सीएमओ व  जिलाधिकारी से शिकायत कर मांग कि है कि जल्द ही डॉक्टरों की एक टीम लगाई  जाए जिससे संक्रमण से पीड़ित सैकड़ों कि संख्या में बच्चों महिलाओं का इलाज हो सके । इनमे सिरदर्द बुखार जुकाम व उल्टी दस्त के मामले सबसे ज्यादा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें