जिस दलित, शोषित व पिछड़ों के बल पर प्रदेश में चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती आज उसी के वोटों की सौदा कर रही हैं। टिकट का रेट पांच करोड़ तक पहुंच गया है। बाबा साहेब के मिशन की हत्या कर थैली भरने की हवस में जमीनी कार्यकर्ताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। यही कार्यकर्ता 2017 के चुनाव में मायावती का प्रदेश से बोरिया विस्तर बांध देगा। यह कहना है बसपा के पूर्व नेता तथा लोकतांत्रिक बहुजन मंच के प्रमुख स्वामीप्रसाद मौर्य का। मौर्य बृहस्पतिवार को मंडलीय कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि सार्वजनिक जीवन बहुत साफ सुथरा होना चाहिए, खास तौर से राजनीति में। जब नेतृत्व ही आंकठ भ्रष्टाचार में डूबा हो तब किस सुधार और बेहतरी की कल्पना की जाए। कहा कि बहुजन समाज पार्टी में जब बाबा साहब का मिशन दम तोड़ने लगा, कांशीराम के विचारों का सौदा होने लगा, कार्यकर्ता की निष्ठा और वफादारी को दरकिनार कर टिकटों की बोली लगने लगी, तो हमने बहन मायावती से समय लेकर 31 अगस्त 2014 को वार्ता की।
कहा कि निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार करने और ऊंची बोली लगाने वालों को टिकट देकर हमने 2012 तथा 2014 का अवसर खोया है, अब अगर खुद को नही बदले तो हम 2017 भी गवां देंगे। हद तो तब हुई जब पंचायत चुनाव में भी टिकटों के नाम पर अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों से ढाई लाख और सामान्य तथा पिछड़ी जाति के लोगों से पांच लाख मांगे गए। मेरे सामने ऐसे ही हालात थे जब हमने बसपा छोड़कर अपना अलग रास्ता चुन लिया। स्वामी प्रसाद ने कहा कि संसद में मायावती ने अपने को दलितों की देवी बताया।
कहा कि देवी देवताओं को 11, 21, 51 या 101 रुपये के प्रसाद चढ़ाया जाता है लेकिन स्वयंभू देवी मायावती एक से पांच करोड़ रुपये चढ़ाने से खुश होती हैं। प्रदेश में दलितों की हत्या, लूट, बलात्कार होते रहे लेकिन दलित की देवी कहलाने वाली मायावती किसीके घर आंसू पोछने नहीं गईं। बुद्ध जयंती, डॉ. अंबेडकर की जयंती, कांशीराम की जयंती कोई दलित, पिछड़ावर्ग मना रहा है तो कार्यक्रम में जाने से भी मना कर देती हैं। उनका अंबेडकर वाद सिर्फ दिखावे का है। आज भाजपा, सपा और कांग्रेस भी बाबा साहेब की जयंती मना रही है। मौर्य ने कहा कि कांशीराम साहेब गली, कूंचे से उठाकर न जाने कितने निर्धन व दलितों को संसद से लेकर विधानसभा तक पहुंचाया। प्रदेश में चार बार बसपा की सरकार बनी। 2012 के चुनाव में 130 ऐसे प्रत्याशियों का टिकट काट दिया गया जो करोड़ों रुपये नहीं दे सकते थे। उनके स्थान पर दौलत वालों को टिकट दिया। परिणाम 80 सीट पर बसपा सिमट गई।
मौर्य ने कहा कि गठबंधन को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। 22 सितंबर को लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में महारैली के बाद आगे की रणनीति पर विचार होगा। अभी सिर्फ मंडलीय सम्मेलन ही प्राथमिकता है। दयाशंकर सिंह प्रकरण पर कहा कि एक ही अपराध में जब दयाशंकर को जेल हो सकती है तो मायावती और उनके कुनबे के अन्य लोगों की क्यों नहीं। राजनीति में बढ़ते अपशब्दों की वार्ता पर नाराजगी जताई। कहा अखिलेश स्वयं अच्छे हो सकते हैं लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में विफल रहे।
इस मौके पर धनपत राव विद्रोही, विनोद त्रिपाठी, चौधरी गंगाराम, अजय यादव, भगवती प्रसाद सागर सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। बहुजन मंच के संयोजक का मंडल प्रभारी जीतेन्द्र पाल, महासचिव मिथलेश श्रीवास्तव मंटू, विनय शाही सहित तमाम कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया। स्वाभिमान का प्रतीक सिर पर साफा बांधकर व तलवार भेंटकर कार्यकर्ताओं ने श्री मौर्य के समर्थन में एकजुटता का संदेश देते हुए संघर्ष का एलान किया।