बच्चों से लेकर बड़ों तक के सिर चढ़कर बोल रहा पतंगबाजी का शौक
कटने से बचने के लिए ज्यादातर लोग पसंद कर रहे चीन का मंझा
शहर की कई दुकानों पर बिक रहा जानलेवा चीन का मंझा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। इन दिनों पतंगबाजी का शौक बच्चों से लेकर बड़ों तक के सिर चढ़कर बोल रहा है। खतरा यह है कि कटने के डर से शौकीन चीन के मांझे से आसमान नापने की कोशिश में जुटे हैं। जबकि चीन का मांझा ब्लेड की तरह धारदार होता है। इस मांझे से पतंग उड़ाने में खुद और अन्य लोगों की जान का जोखिम में डालने जैसा है। यकीन न हो तो शनिवार को शाहजहांपुर और इससे पहले वाराणसी की घटना पर गौर कर लीजिए। इसमें एक सिपाही और युवक की जान जा चुकी है।
शहर में पुरानी बस्ती, दक्षिण दरवाजा, गांधीनगर आदि बाजार से लेकर कस्बों तक में पतंग की दुकानों पर चीन का मांझा बिक रहा है। बच्चों से जुड़ा खेलने का सामान होने की वजह से कोई ध्यान नहीं देता है। मगर, लापरवाही से इस्तेमाल से कइयोंं की जान जोखिम में पड़ रही है। पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी चीन का मांझा 200 से लेकर 1000 रुपये तक की कीमत में बिक रहा है।
इसकी मांग इतनी ज्यादा है कि दुकानदार ग्राहक के कहने पर आसानी से इसे मुहैया करवा देते हैं। दुकानदारों के मुताबिक, चीन के मांझा मजबूत होते हैं, इसलिए लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं। एक दुकानदार ने बताया कि हम इसे ग्राहक की मांग पर ही देते हैं। दुकान में इसे नहीं रखते।
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शीशे और मेटलिक पाउडर से बनता है
जानकारी के मुताबिक, चीन के मांझे को नायलाॅन, लेड और मैटेलिक पाउडर से मिलाकर बनाया जाता है, जो काफी लचीला होता है। पतंग के पेच लड़ाते समय यह आसानी से कटने के बजाय खिंच कर और बढ़ जाता है। सामान्य डोर से बने मांझे से सस्ता होने के चलते भी लोग इसे खरीदते हैं। पतंग कटने के बाद यह मांझा पंछियों के साथ ही दो पहिया वाहन चालकों के हाथ और गले में फंसकर उन्हें घायल करता है। कई मामलों में इससे लोगों की जान भी जा चुकी है।
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सख्त कार्रवाई ही लगा सकती है लगाम
वर्ष 2017 में एनजीटी ने चीन के मांझे पर पाबंदी लगा दी थी। इसके बाद कहा गया था कि चीन का मांझा बेचने वालों पर एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एक्ट (पर्यावरण संरक्षण अधिनियम) के तहत कार्रवाई की जाए। यदि किसी के खिलाफ इस अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी तो उसे पांच साल की सजा या एक लाख जुर्माना तक हो सकता है। मगर, इस पर कार्रवाई नहीं की जाती है। इसकी एक वजह यह भी है कि कोई आगे आता नहीं और इसकी खरीद-फरोख्त करने वाले इसका फायदा उठाते हैं।
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कोट
चीन के मांझे पर एनजीटी की तरफ से प्रतिबंध लगाया गया है। इसे बेचना अपराध की श्रेणी में आ चुका है। शहर में अगर कहीं चीन का मांझा बिक रहा है तो इसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
-सत्येंद्र भूषण त्रिपाठी, सीओ सिटी