बस्ती/हर्रैया। जिले में आग से लोगों को सुरक्षा देने वाले अग्निशमन केंद्र के पास मुख्यालय पर पिछले दो सालों से अपनी कोई बिल्डिंग नहीं है। जिन जिम्मेदार अधिकारियों को जिला मुख्यालय पर बैठना चाहिए वे यहां से 35 किलोमीटर दूर हर्रैया में बैठ रहे हैं।
अग्निशमन विभाग की नई-नई गाड़ियां शेड के अभाव में धूप पानी झेल कर समय से पहले पुरानी पड़ जा रही हैं। विभाग पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। इन्हीं के भरोसे लाखों की आबादी के साथ तमाम औद्योगिक व व्यावसायिक गतिविधियों वाले बाजार, सरकारी कार्यालय सहित सैकड़ों विद्यालयों की सुरक्षा है। कार्यों में लेट लतीफी आम बात है मगर आगजनी से जैसे अति संवेदनशील घटनाओं में होने वाली जनहानि व आर्थिक नुकसान को रोकने वाले महकमे के लिए बिल्डिंग निर्माण में हो रही देरी लोगों पर भारी पड़ सकती है। जिला मुख्यालय पर ऐसी घटनाओं के समय तुरंत मदद के लिए कोतवाली परिसर में दो कमरे में करीब दर्जन भर फायर कर्मियों के रहने की व्यवस्था की गई है, जो नाकाफी है।
बताते चलें कि जिस बिल्डिंग में जिला अग्निशमन केंद्र चल रहा था वह जर्जर हो चुका था। उसे गिराकर नए बिल्डिंग बनाने का कार्य किया जाना है मगर निर्माण कार्य के लिए शासन को भेजे जाना वाला डीपीआर व इस्टीमेट भेजने में ही काफी देर हो गई, जिसके चलते अब तक निर्माण की प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई। अग्निशमन अधिकारी यतींद्र नाथ ने बताया कि बिल्डिंग जर्जर हो गई थी। उसे नियमानुसार ध्वस्त कर मलबा नीलाम कराया गया है। बिल्डिंग का डीपीआर इस्टीमेट के साथ शासन को भेजा जा चुका है। जल्द ही स्वीकृति मिलने वाली है। मुख्यालय पर कोतवाली में एक कमरे में किसी तरह से व्यवस्था कर काम चलाया जा रहा है। चार दमकल वाहनों के साथ चालक व फायरमैन जिला मुख्यालय पर 24 घंटे तैनात हैं। हरैया से केवल ऑफिशियल कार्य किया जाता है।
हरैया के भदावल गांव के सामने हाइवे के किनारे करीब ढाई एकड़ जमीन में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित फायर स्टेशन का निर्माण 2016-17 में शुरू हुआ।
करीब तीन वर्ष में बिल्डिंग तैयार हुई तो यहां पर एक फायर ऑफिसर सहित कुल 22 कर्मियों की नियुक्ति हुई। इनमें 16 फायरमैन शामिल हैं। यहां पर आग बुझाने वाले दो वाहन और दो चालक की तैनाती की गई है। कर्मियों के रहने के लिए आवास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। दो साल पहले यहीं पर जिला अग्निशमन केंद्र का मुख्यालय शिफ्ट किया गया है।