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Basti News: सहालग में खुलेआम नकली बिल का खेल...करोड़ों की कर चोरी

Fri, 21 Nov 2025 01:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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बस्ती। सहालग की शुरुआत के साथ ही शहर में शादियों का सीजन जोर पकड़ चुका है। लेकिन चहल-पहल और रौनक के बीच बैंक्वेट हॉल, कैटरिंग और शादी से जुड़े कारोबारियों की मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि लोग इसे सहालग नहीं, बल्कि ‘लूट उत्सव’ कहने लगे हैं। कई प्रतिष्ठान ग्राहकों को असली बिल की जगह नकली पर्ची थमा रहे हैं, जबकि रेट मनमर्जी से दोगुने-कहीं-कहीं उससे भी अधिक कर दिए गए हैं। लोगों का कहना है कि सहालग आते ही यह कारोबार एक तरह से टैक्स-फ्री ओपन मार्केट बन जाता है।
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कैटरिंग फर्म में काम करने वाले गोविंद बताते हैं कि सहालग से दो महीने में इतनी कमाई हो जाती है जितनी ऑफ-सीजन में छह महीने में भी नहीं होती। ग्राहक जल्दी में होता है, और उसे बिल चेक करने की फुर्सत कहां होती है। हाल में बेटी की शादी संपन्न कराने वाले इंद्रजीत सिंह बताते हैं कि जैसे ही वे बुकिंग के लिए किसी बैंक्वेट हॉल पर जाते थे, उन्हें पहले ही बता दिया जाता था कि सीजन चल रहा है, रेट बढ़े हुए हैं...अभी एडवांस दें, वरना जगह नहीं मिलेगी। मजबूरी में तीन महीने पहले एडवांस देना पड़ा।
कैटरिंग का काम कर चुके उग्रसेन यादव बताते हैं कि आजकल पैकेज बताकर बिल बढ़ाने का नया ट्रेड चल रहा है। इन पैकेजों में स्पेशल डेकोरेशन, प्रीमियम कटलरी, एक्सक्लूसिव लाइटिंग, सूप कॉर्नर, स्पेशल स्वीट डिश जैसे आइटम जोड़कर बिल को काफी बढ़ा दिया जाता है। ग्राहक को क्या मिला, क्या नहीं, यह देखने का उसे समय ही नहीं मिलता।
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नकली बिलिंग का पूरा जाल, ऐसे बचता है टैक्स
- ज्यादातर जगहों पर ग्राहकों को बिल के नाम पर सिर्फ एक छोटी पर्ची दी जाती है। न उसमें जीएसटी नंबर, न प्रतिष्ठान का पूरा नाम-बस तारीख और रकम होती है। यही सबसे बड़ा टैक्स चोरी का रास्ता है।
- बैंक्वेट हॉल की फाइल में एक असली रेट लिस्ट रहती है-जैसे प्रति प्लेट सात सौ रुपये लेकिन सहालग में यह रेट बढ़ाकर सीधे 12 सौ से 15 सौ कर दिया जाता है।
- ये बढ़े हुए रेट किसी रजिस्टर में दर्ज नहीं होते। जीएसटी में शामिल बताया जाता है, जमा नहीं किया जाता है।
- कई कैटर बिल में जीएसटी इनक्ल्यूसिव लिख देते हैं, लेकिन विभाग में एक रुपये भी जमा नहीं करते।
- ग्राहक टैक्स देकर चलता बनता है, पर सरकार को कुछ नहीं मिलता। कई जगह असली रकम का एक हिस्सा ही रजिस्टर में चढ़ाया जाता है।
नोट: (जीएसटी के अधिवक्ता मनमोहन श्रीवास्तव काजू के अनुसार)
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उपभोक्ता के लिए सुझाव
- हमेशा जीएसटी वाला असली बिल लें।
- सीजन रेट का आधार पूछें और लिखित रूप में लें।
- एडवांस देते समय कॉन्ट्रेक्ट पेपर जरूर बनवाएं।
- पैकेज में शामिल हर आइटम की लिस्ट तैयार कराएं।

कोट
जो पंजीकृत बैंक्वेट हॉल या कैटर्स फर्म हैं,उनके लिए जीएसटी काटना अनिवार्य है। यदि वे ऐसा करते पकड़े गए तो भारी जुर्माना भुगतना होगा। जिनका टर्नओवर 20 लाख से कम है, उनका पंजीकरण कराया जाएगा। अगर किसी ने 20 लाख से ज्यादा टर्नओवर करके कागज में हेरफेर करेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
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- उपेंद्र यादव, उपायुक्त राज्यकर
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