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Basti News: सात माह से नेत्र जांच उपकरण खराब प्रेशर और नंबर की नहीं हो पा रही जांच

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रोगी के आंख की जांच करते नेत्र सर्जन डॉ. हरीश कुमार   स्रोत संवाद
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बस्ती। जिला अस्पताल के नेत्र विभाग में आंखों की जांच करने वाले महत्वपूर्ण उपकरण सात माह से अधिक समय से खराब पड़े हैं। इससे आंखों का प्रेशर, चश्मे का नंबर और ग्लूकोमा समेत कई जरूरी जांच नहीं हो पा रही हैं।
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मजबूरन मरीजों को निजी अस्पतालों में जांच करानी पड़ रही है। इसके लिए उन्हें डेढ़ से दो हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। नेत्र विभाग की ओपीडी में रोजाना 80 से 100 मरीज पंजीकृत होते हैं। इनमें करीब 10 से 12 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें आंखों के प्रेशर, ग्लूकोमा और अन्य जरूरी जांच की आवश्यकता होती है।
ऑटो रिफ्रैक्टोमीटर खराब होने से आंखों के नंबर और कॉर्निया की वक्रता (कर्वेचर) की जांच प्रभावित है। वहीं एनसीटी (नॉन-कॉन्टैक्ट टोनोमीटर) खराब होने के कारण आंख के अंदर के दबाव (इंट्राऑक्युलर प्रेशर) की सही जांच नहीं हो पा रही है। इससे ग्लूकोमा की जांच और मरीजों के उपचार में भी परेशानी हो रही है।
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जिन मरीजों को इन जांचों की जरूरत पड़ रही है, उन्हें जिला अस्पताल से बाहर जांच कराने के लिए भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि ग्लूकोमा और कर्वेचर की जांच के लिए मरीजों को कैली अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है। निजी केंद्रों पर जांच कराने में मरीजों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
बुधवार को नेत्र विभाग की ओपीडी में 110 मरीज पंजीकृत हुए। नेत्र सर्जन डॉ. हरीश कुमार ने बताया कि इन दिनों आंखों में संक्रमण और ड्राईनेस के मरीज अधिक आ रहे हैं। संक्रमण वाले मरीजों को दवा के साथ धूप से बचने की सलाह दी जा रही है। लापरवाही करने पर संक्रमण बढ़ सकता है।
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