बस्ती। बेतहाशा गर्मी का असर दिमाग पर भी दिखने लगा है। अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में लोग तेज सिरदर्द, चक्कर, उलझन, आंखों के आगे अंधेरा छाने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल के सीटी स्कैन यूनिट में जांच की संख्या भी बढ़ गई है। बुजुर्गों में सांस, बुखार, हृदय और याददाश्त जैसी समस्याएं आ रही है।
चिकित्सकों ने रिपोर्ट के अनुसार, बताया कि सिरदर्द संबंधी सीटी जांच कराने वालों की तादाद ज्यादा है। इनमें महिलाएं-पुरुष से अधिक हैं, उनमें भी याददाश्त की कमी है। चिकित्सकों के अनुसार, गर्मी और उमस से लगातार पसीना निकल रहा है, इससे शरीर में नमक की मात्रा कम होते ने बुजुर्गों के दिमाग का संतुलन बिगड़ जा रहा है। पानी की कमी न होने दें। फिजिशियन डॉ. एसडी ओझा के मुताबिक, तेज गर्मी में शरीर का तापमान बढ़ने पर डिहाइड्रेशन होता है।
इससे दिमाग की रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ने से सिरदर्द बढ़ने की आशंका रहती है। महिलाओं में माइग्रेन की समस्या अधिक होती है जो गर्मी से ट्रिगर हो जाती है। सिरदर्द के साथ उल्टी, बेहोशी, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या बोलने में दिक्कत हो तो सीटी स्कैन का सुझाव दिया जाता है।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. एके दूबे के मुताबिक, तेज धूप, शरीर में पानी की कमी, लगातार गर्म वातावरण में रहने और उच्च रक्तचाप की वजह से तेज सिरदर्द के मामले बढ़ने की आशंका रहती है। कई मरीजों में ब्रेन स्ट्रोक, नसों में सूजन, ब्लीडिंग जैसी आशंकाओं को जांचने के लिए हेड सीटी स्कैन कराना पड़ रहा है।
सामान्य दिनों के सापेक्ष गर्मी में सिरदर्द के मरीजों की संख्या 20-30 फीसदी तक बढ़ी है। इसमें बुजुर्ग समेत युवा और कामकाजी लोग भी शामिल हैं। बुधवार को ओपीडी में 954 मरीज आए, अधिकांश मेडिसिन विभाग के थे।
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सिरदर्द की वजह
- तेज धूप से शरीर में पानी और नमक की कमी।
- तेज धूप और लू का असर, पर्याप्त नींद न लेना।
- ज्यादा देर तक मोबाइल फोन और स्क्रीन देखते रहना।
- हाई ब्लड प्रेशर, माइग्रेन, तनाव, थकान बढ़ना।
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बचाव के उपाय
- दिनभर में कई बार सादा पानी या ओआरएस पीयें।
- दोपहर की सीधी तेज धूप में घर से बाहर न निकलें।
- हल्का पौष्टिक भोजन करें, स्क्रीन देखने के दौरान ब्रेक लें।
- सिरदर्द बना रहे तो डॉक्टर को दिखाएं।
कोट
जिला अस्पताल में दवाएं पर्याप्त मात्रा में हैं। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, हालत में सुधार होने पर डिस्चार्ज किया जाता है।
-डॉ. खालिद रिजवान अहमद, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती।