बस्ती। ईदमिलादुन्नबी का पर्व गुरुवार को परंपरागत तरीके से मनाया गया।
जुलूसेमोहम्मदी शहर के पक्का बाजार से होते हुए पुरानी बस्ती के पांडेय
बाजार में पहुंचा। जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। जुलूस में शामिल
लोगों को अकीदतमंदों ने स्टाल लगाकर तवरुरुक वितरित करने के साथ ही पीने के
पानी का भी इंतजाम किया था।
योमुन्नवी कमेटी की ओर से शहर के
पक्का बाजार से जुलूसेमोहम्मदी निकाला गया। जो शहर के गांधीनगर, रोडवेज
तिराहा, दक्षिण दरवाजा, मंगल बाजार होते हुए पांडेय पहुंचा। मुख्य मार्ग पर
जगह जगह भव्य स्वागत द्वार लगाए गए थे। जुलूस का नेतृत्व सैयद जफर अहमद,
आरिफ अली, सैयद अलाउददीन रज्जन ने किया।
इस दौरान अलाउद्दीन राइनी,
असरफ हुसैन, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव,
परवेज जाफरी, शब्बीर अहमद, जीशान हैदर रिजवी शानू, रहमान खान, शाहिद अली,
बदरुज्जा, मसूद अहमद, अनीस अहमद, हैदर अली सहित बड़ी संख्या में लोगों ने
शिरकत की।
कुदरहा प्रतिनिधि के अनुसार, जामिया अरबिया अशरफिया
गायघाट के बच्चों ने प्रबंधक डॉ किताबुल्लाह खां के नेतृत्व मेें जुलूस
निकाला। बच्चों ने पैगंबर साहब को याद किया। जुलूस मदरसे में पहुंचकर जलसे
में तब्दील हो गया।
इसमें मौलाना गुलाम यासीन, डॉ मोहम्मद अहमद,
यूसुफ अंसारी, सादिक अली, सुहेल अहमद, राजेंद्र प्रसाद, अब्दुल रकीब खान,
हाफिज खान, मोइनुदीन शाह, शकील सिद्दकी, जान मोहम्मद, जिया अंसारी आदि
मौजूद रहे।
बहादुरपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत नगर बाजार सहित आसपास
के गांवों में ईदमिलादुन्नबी का त्योहार मनाया गया। शुरुआत हाफिज नूर हाफिज
नूर आलम ने कुरआन पाक की तिलावत से की। नगर बाजार के मकतब इस्लामिया से
जुलूस निकलकर पूरे क्षेत्र का भ्रमण करते मकतब में समाप्त हुआ।
जुलूस
में ऊंट व घोड़े तथा खान ए काबा का नक्शा लोगों के कौतूहल का केंद्र बना
रहा। इस दौरान जलसे को खिताब करते मौलाना जकीउल कादरी ने पैगंबर मोहम्मद
साहब के जीवन पर प्रकाश डाला और कहा कि आपकी पूरी जिंदगी मानवता के कल्याण
में गुजरी।
आप भूखे रहकर गरीबों को खाना खिलाते रहे। मोहम्मद साहब
ने अपने सहाबियों से कह दिया था कि इस्लाम में दहशतगर्दी की कोई जगह नहीं।
इस्लाम दहशतगर्दी की तालीम नहीं देता। इस्लाम भाई चारे और शांति का पैगाम
देता है। मौलाना साबिर अली ने कहा कि हमारे नबी का जन्म मानवता के कल्याण
के लिए हुआ।
नबी के जन्म से पहले अरब देश में तमाम बुराईयां अपने
चरम पर थीं। लोग बेटी पैदा होने पर उसे जिंदा जमीन में दफन कर देते थे।
शराब के नशे में लोग झूमते रहते थे। जुआ, शराब खोरी, अय्याशी व चोरी जैसी
घटनाएं आम थीं।
छोटी-छोटी बातों पर कत्ल करने से लोग गुरेज नहीं
करते थे। लेकिन नबी ए पाक के जन्म लेने के बाद आपने इन प्रथाओं पर प्रतिबंध
लगा दिया और लोगों को सही तरीके से जीने का सलीका बताया। लोगों को बेटियों
को जिंदा दफन करने से रोका और बेटियों का महत्व बताया और कहा कि ऐसा करने
वाले से अल्लाह नाराज होता है।
जुलूस में स्थानीय लोगों ने जगह-जगह
मिष्ठान का वितरण किया। इस अवसर पर मोहम्मद वारिस, शाबान इदरीसी, डॉ
अन्सारी, जमील अहमद, मेहताब अहमद, इकरा खान, मो शकील, हुस्ना खान, प्रवीन
फातमा, तमन्ना, शमशुल हुदा आदि मौजूद रहे।
सल्टौआ प्रतिनिधि के
अनुसार, क्षेत्र के सल्टौआ, लक्ष्मणपुर, औसपुर, वाल्टरगंज, हसनापुर, खरहरा,
कनेथू, पचमोहनी, आमा, सोनहा, सेखुई, पिपरहिया, देईपार, मुड़री, केवटाखोर,
बंजारिया, गौहानियां, पड़िया, जमदाशाही, मीरमझौआ, सुभाई आदि गांव में
ढोल-ताशे के साथ जुलूस निकाला और मुल्क की सलामती के लिए मस्जिदों व मजारों
पर दुआ मांगी।
विभिन्न गांवों से निकाले गए जुलूस में मोहम्मद
शफीक, शाहआलम, गुड्डू, जैफुल्लाह, मोहम्मद हद्दीश, मनवैर, सफीकुर्ररहमान,
बक्सुल्लाह, अजमत, अशगरअली, समीर, अशलम, रहमत अली, गब्बू, सराफत, नईमशाह,
वलीवल्लाह, इब्राहिम, हकीकुल्लाह सहित तमाम लोग शामिल रहे।
वहीं
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना वाल्टरगंज क्षेत्र के गांवों में एसओ
वीर सिंह मय फोर्स लग रहे। सोनहा थाना क्षेत्र में एसओ निर्भय नारायन सिंह
अपने हमराहियों के साथ लगे रहे।