फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Basti News: ठंड का असर, डाॅक्टर विलंब से पहुंच रहे हैं अस्पताल

Sat, 04 Jan 2025 11:44 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
विज्ञापन
चेस्ट फिजी​शियन कक्ष खाली-
विज्ञापन
जिला अस्पताल में सुबह 11 बजे से बढ़ गई मरीजों की संख्या, एक बजते होने लगी कम
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। ठंड का असर जिला अस्पताल की व्यवस्था पर भी पड़ा है। डॉक्टर ओपीडी कक्ष में विलंब से पहुंच रहे हैं। मरीजों की ओपीडी भी घट कर 522 रह गई है। जिला अस्पताल में सुबह नौ बजे तक न तो ओपीडी में डाॅक्टर नजर आए और न ही मरीज। अधिकारी और कर्मचारी भी देरी से पहुंच रहे हैं।
शनिवार की सुबह करीब नौ बजे जिला अस्पताल के परामर्श चिकित्सक कक्ष, नाक, कान, गला, चर्म, बाल, सर्जरी और नेत्र रोग समेत अन्य विभागों में चिकित्सक नहीं पहुंचे थे। इक्का दुक्का मरीज ओपीडी की गैलरी में डॉक्टर का इंतजार करते दिखे। औषधि और पंजीकरण काउंटर खुले थे। औषघि काउंटर पर एक-दो मरीज पुराने पर्चे का दवा लेते दिखे।
विज्ञापन

अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और खून आदि जांच काउंटर पर नौ बजे के बाद इक्का-दुक्का कर्मचारी आते नजर आए। एक महिला बच्चे के अल्ट्रासाउंड कराने के लिए खड़ी दिखी। महिला ने बताया कि अभी टेक्नीशियन नहीं आए हैं। इंतजार करने के लिए कहा गया है। नेत्र रोग विभाग की ओटी खुली थी। मरीज भी थे। मगर, डाॅक्टर और कर्मचारी नहीं दिखे। फिजियोथेरेपी विभाग में चार मरीज दिखे। फिजियोथेरेपिस्ट विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक चार मरीज आए है।
सुबह 9:30 बजे के बाद ओपीडी में चिकित्सकों का आना शुरू हुआ। सुबह 10 बजे बाल रोग विभाग के कक्ष में डॉ. नरेश अग्रवाल, जर्नल सर्जरी विभाग में डॉ. अर्सद अहमद ओपीडी कक्ष में बैठे नजर आए। इसके बाद अन्य चिकित्सकों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था।
..
ठंड से ओपीडी में घट गई मरीजों की संख्या
ठंड के कारण जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या घट गई है। 15 दिन पहले तक 700 से 800 तक की ओपीडी होती थी। अब घटकर 500 तक पहुंच गई है। शनिवार को ओपीडी 522 मरीजों की रही। तीन जनवरी को 590 और दो जनवरी को 588 मरीजों की ओपीडी रही।
..
वार्ड के मरीजों को देखने के कारण होता है विलंब : सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीके सोनकर ने बताया वार्ड के मरीजों को देखने के कारण ओपीडी में चिकित्सकों को आने में देरी होती है। कोई गंभीर मरीज होता है तो उसे देखना प्राथमिकता में शामिल है।
..
कान से सुनाई नहीं देता है। काम पर जाना होता है, इसलिए सोचा जल्दी अस्पताल पहुंच कर डॉक्टर को दिखा दें। मगर, यहां अभी कोई नहीं है। अब इंतजार करना पड़ेगा।
विज्ञापन

- मो. इस्तेयाक, मरीज पठान टोला
...
बच्चे की तबीयत खराब है। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड लिखा है। एक घंटा हो गया। मगर टेक्नीशियन नहीं आए हैं। 10 बजे के बाद आने के लिए कहा गया है। सुबह से आकर बहुत इंतजार कर रही हूं।
-रेनू, कलवारी टोला
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें