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इको फ्रेंडली दीपावली से बढ़ेगी सामाजिक खुशियां

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इको फ्रेंडली दीपावली से बढ़ेगी सामाजिक खुशियां
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पटाखा नहीं पौध लगाकर मनाएंगे त्योहार
पर्यावरण सुरक्षा का संकल्प भविष्य को करेगा सुरक्षित
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दीपोत्सव का पर्व करीब है। परंपरा के अनुसार इस पर्व की खुशी पटाखे छोड़कर मनाई जाती है, मगर पर्यावरण को देखते हुए पटाखों से लोग धीरे-धीरे दूरियां बनाने लगे हैं। त्योहारों पर खुशी के लिए पटाखे नहीं, बल्कि पर्यावरण का संरक्षित होना जरूरी है। कुछ घंटों की खुशियों के लिए पर्यावरण से खिलवाड़ा की भरपाई आसान नहीं है। ऐसे में पर्यावरण को बचाने के लिए लेने की जरूरत है। ‘अमर उजाला’ ने इसे लेकर युवाओं व महिलाओं की राय जानी। अधिकांश ने कहा, इको फ्रेंडली दीपावली मनाएंगे।
निजी कंपनी में नौकरी करने वाले कटरा निवासी मुकेश कुमार का कहना है कि पिछले पांच वर्ष से दीपोत्सव की खुशियां पौधरोपण कर, गरीबों में मिठाई बांट कर मनाते हैं। पटाखों से पर्यावरण को दो तरह से नुकसान होता है। धुएं से वातावरण प्रदूषित होता है, जबकि तेज आवाज ध्वनि प्रदूषण का कारक है। इस बार भी दीपोत्सव की खुशियां एक पौध लगाकर मनाएंगे। सभी त्योहारों पर लोग पौध लगाकर खुशियां मनाएं तो आने वाले दिन बेहतर होगा।
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बड़े वन निवासी राहुल विश्वकर्मा ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी पर है। दीपोत्सव की खुशियां पटाखा के बजाय मिठाई बांट कर मनाएं। एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियों को चार चांद लगाएं। दीपावली हर घर में खुशियां लेकर आती है। पर्यावरण स्वस्थ है तो जीवन सुरक्षित होगा।
जामडीह निवासी गृहिणी तृप्ति सिंह ने कहा कि दीपावली पर घरों में पकवान बनाएं, खुद खाएं और आने वालों को भी खिलाएं। पटाखों से लोगों को दूर करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि दीपावली पर पिछले दो साल से वह पटाखे जलाने के बजाय मिठाई बांटती हैं। गरीब परिवारों को कपड़े व मिठाई देकर उन्हें बेहद सुखद अनुभूति होती है। दीपोत्सव खुशियों का पर्व है। पटाखे पर्यावरण को दूषित करते हैं। इससे बचिए, पर्यावरण को भी प्रदूषित होने से बचाएं।
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कटरा निवासी क्रांति सहानी कहती हैं कि उनका परिवार दीपोत्सव की खुशियां मिठाई बांट कर मनाता है। यह परंपरा परिवार में लंबे समय से है। पटाखों से बच्चों को प्रेम रहता है, मगर उन्हें समझा दिया जाता हैै। परिवार के अन्य सदस्य केवल सौहार्द पूर्ण दीपोत्सव में शामिल होते हैं। परिवार का मुखिया हर पर्व पर एक पौध रोपित करता है, जिस पर सभी का प्यार उमड़ता है। प्यार व सौहार्द के त्योहार दीपोत्सव को और सुंदर व पवित्र बनाने के लिए सभी को संकल्प लेना चाहिए कि वे पर्यावरण की रक्षा के लिए समर्पित होकर खुशियां मनाएंगे।
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