बस्ती। जच्चा-बच्चा की सुरक्षा और मातृ शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए किए जा रहे तमाम प्रयास सिस्टम की लापरवाही से दम तोड़ रहे हैं। सीएचसी हर्रैया के आयुष्मान आरोग्य मंदिर मरवटिया से जुड़े एक मामले की जांच में इसकी तस्दीक हुई है।
गांव की एक महिला के नौ प्रसव हुए लेकिन पांच नवजात की मौत हो गई। जांच में पता चला है कि उच्च जोखिम की श्रेणी में चिह्नित गर्भवती की विभाग की ओर से निगरानी नहीं की गई और सिर्फ दो बार प्रसव सीएचसी में कराए गए। तीन प्रसव नसबंदी के बाद हुए। जांच में लापरवाही सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
बीते बृहस्पतिवार को स्वास्थ्य योजनाओं की समीक्षा के दौरान संस्थागत प्रसव का मामला उठा था। सीएचसी हर्रैया से जुड़े आयुष्मान आरोग्य मंदिर मरवटिया में काफी कम प्रसव की बात आई थी।
अगले दिन सीडीओ सार्थक अग्रवाल मरवटिया पहुंचे और सीएचओ विजय पाल, आशा रीता देवी और एएनएम अंजलि शर्मा से पूछताछ की तो बताया गया कि गांव की महिलाएं अस्पताल नहीं आना चाहतीं और घर में ही प्रसव को प्राथमिकता देतीं हैं। सीडीओ ने यूपी टीएसयू के जिला विशेषज्ञ यशपाल को जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए।
जांच में स्वास्थ्य विभाग के सिस्टम की पोल खुल गई। पता चला कि मरवटिया गांव के रहने वाले सावनदीन की पत्नी रंजना का नौ बार प्रसव हो चुका है लेकिन सिर्फ चार लड़के जीवित हैं। तीन बेटियों और दो बेटो की मौत जन्म के दो माह के भीतर हो गई। सात प्रसव घर में ही हुए जबकि दो प्रसव सीएचसी में कराए गए। 25 नवंबर 2025 को घर में प्रसव हुआ, नवजात की मौत तीन जनवरी को हो गई। गर्भावस्था के दौरान एएनएम ने केवल एक एएनसी सेवा दी, एमसीपी कार्ड भी नहीं बनाया गया।
आशा ने एक भी एचबीएनसी भ्रमण नहीं किया। आशा का कहना था कि इस अवधि में उसकी बीएलओ के तौर पर ड्यूटी लगी थी। सीडीओ ने आशा, एएनएम व पर्यवेक्षणीय अधिकारियों की भूमिका तय करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की स्पष्ट संस्तुति की रिपोर्ट देने को सीएमओ से कहा है।