पटवाई के मथुरापुर पर पीसीएफ के केंद्र पर खुले में पड़ा गेहूं । अमर उजाला
बस्ती। न्यूनतम मूल्य समर्थन योजना में गेहूं खरीद सप्ताह भर और चलेगी। हालांकि, खरीद करीब-करीब बंद हो चुुकी है। इसका कारण है कि बड़े काश्तकारों ने गेहूं को डंप कर लिया है, जबकि सीमांत किसान गेहूं क्रय केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में खरीद का ग्राफ 55996 एमटी पर ठहर गया है।
गेहूं खरीद की तिथि 15 जून से बढ़ाकर शासन ने 25 जून कर दी है। इधर खरीद की तिथि बढ़ी उधर बाजार में गेहूं का मूल्य बढ़ गया है। इसके चलते किसान क्रय केंद्रों की ओर रुख नहीं कर रहे हैं। नतीजतन खरीद का ग्राफ ठहर गया है। अधिकारियों की मानें तो लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 67 फीसदी ही गेहूं की खरीद हो पाई है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि बड़े काश्तकार अब गेहूं बेचने नहीं आ रहे हैं। वह अब भी बाजार भाव बढ़ने के इंतजार में हैं।
इधर, खरीद की तिथि बढ़ने से सहकारी समितियों के सचिव परेशान नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि खरीद की तिथि तो बढ़ा दी गई। लेकिन डिलेवरी की तिथि नहीं बढ़ाई गई है। सचिवों का तर्क है कि 30 जून तक डिलेवरी दी जानी है। इसके बाद उनके गेहूं पर एक प्रतिशत नमी काटी जाती है। ऐसे में उनके लिए बड़ा संकट होगा। समितियों पर अब भी गेहूं आ रहा है। उनके केंद्रों पर भंडारण के लिए गेहूं पड़ा है। 25 जून तक खरीद की डिलेवरी 30 जून तक नहीं हो सकेगी। ऐसे में एक प्रतिशत नमी का नुकसान उठाना पड़ेगा।
डिप्टी आरएमओ गोरखनाथ त्रिपाठी ने कहा कि खरीद का लक्ष्य पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए हैं। बाजार भाव बढ़ने के कारण काश्तकार गेहूं केंद्रों पर नहीं लेकर आ रहे हैं। बड़े काश्तकारों ने तो गेहूं डंप कर लिया है। वे बाजार को और चढ़ने के इंतजार में हैं। रही डिलेवरी की बात तो मंडी स्थल पर भंडारण किया जा रहा है।