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Basti News: किसानों को मायूस कर रही सूखी नहरें, फसलों को पानी की दरकार

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हरैया क्षेत्र में सूखी पड़ी नहर -संवाद
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हरैया। तहसील क्षेत्र में किसानों की सुविधा के लिए करीब तीन दशक पहले खोदी नहरें किसानों के लिए अभिशाप बन गई हैं। इन नहरों में सिंचाई के समय पानी का अकाल रहता है तो बरसात में घाघरा नदी के बाढ़ का पानी तिहाई बर्बाद कर देता है। यही नही कभी-कभी टूटी-फूटी नहर में अचानक पानी छोड़े जाने से जलभराव से बोई गई फसलें तबाह हो जाती है।
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बता दें कि हरैया तहसील क्षेत्र में किसानों को कम लागत में अच्छी सिंचाई की सुविधा देने के लिए विक्रमजोत विकास खंड के भौसिया गांव में सरयू नदी की धारा से जोड़कर कैनाल पंप की स्थापना करीब 25 वर्ष पूर्व की गई। तत्कालीन सिंचाई मंत्री ओमप्रकाश सिंह द्वारा इस कैनाल पंप के साथ पंप हाउस परिसर से सटे एक सिंचाई विभाग के आलीशान निरीक्षण भवन का लोकार्पण एक साथ किया गया।
इसके साथ ही प्रत्येक विकास खंड के गांवों के किसानों को सिंचाई की सुविधा देने के लिए सैकड़ों किलोमीटर छोटी-छोटी नहर की शाखाओं का निर्माण हुआ। जिसके बाद किसानों को उम्मीद जगी की अब डीजल चालित इंजन व बिजली से चलने वाले ट्यूबवेल से मुक्ति मिलेगी और न्यूनतम सिंचाई खर्च पर अच्छी पैदावार का लाभ मिलेगा। परंतु उनकी इन उम्मीदों के पंख 25 वर्ष बीत जाने के बाद अब तक नहीं लग सका।
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वजह की शायद ही कभी ऐसा हुआ हो की इन नहरों में सिंचाई के समय पानी की उपलब्धता रही हो। किसान इस सुविधा से खुशहाल तो नही हो सकी पर विभागीय अधिकारी व ठेकेदार जरूर मालामाल हो रहे हैं। बीते वर्ष इसी नहर की एक शाखा जो हरैया के तपसीधाम से होकर कई गांवों तक जाती है की सफाई के नाम पर महीनों पोकलैंड मशीन चली और जानकारी के अनुसार करीब दो करोड़ रुपये से अधिक धनराशि खर्च हुआ।
आज जब गन्ने, मक्का व अरहर, चरी की फसलों के साथ ही धान की नर्सरी के लिए पानी की दरकार है तो सूखी नहरें फिर किसानों को उदास कर रहीं हैं। लोगों ने नहर में पानी छोड़े जाने की मांग की है।
कोट
किसान बोले- समय पर कभी नही मिला पानी



आज तक कभी सिंचाई के समय नहरों में पानी की उपलब्धता नही रही। अधिकतर जगह नहरों में झाड़ियां उगी हैं। जिनमें नीलगाय, सियार आदि जानवरों ने बसेरा बना रखा है। यह दिन भर रखवाली के बाद रात में फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।



-वीरभद्र, ग्राम दुबौली मिश्र हरैया







समय पर सिंचाई के लिए पानी तो शायद ही कभी मिला हो पर प्रायः गेंहू की बुवाई के बाद अचानक पानी छोड़े जाने से उगती फसलें गलने की घटनाएं आम रही हैं। सैकड़ों किलोमीटर नहर की खोदाई कर सिंचाई के समय पानी न मिलने से इससे फायदा कुछ नही क्षति ज्यादा है।



-रामबरन चौधरी, ग्राम बरहपुर हरैया

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नहर की सुविधा से किसानों को अब तक कोई फायदा नही हुआ है। आए दिन असमय पानी छोड़े जाने से फसली तबाही की खबरें निराश करने वाली है। प्रायः बरसात के दिनों जब पानी की आवश्यकता नहीं होती तब बाढ़ नियंत्रण के लिए नहरों में छोड़ा जाने वाला पानी तबाही का कारण बनता है।
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-पारसनाथ चौधरी, ग्राम लहिलवारा हरैया
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